बेंगलुरु के अटके इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने के लिए कर्नाटक सरकार ने रक्षा मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है। राज्य ने रक्षा जमीन के ट्रांसफर और HAL फैसिलिटी के आसपास ऊंचाई संबंधी नियमों में नरमी की अपील की है, ताकि शहरी विकास कार्यों में आ रही रुकावटें दूर हो सकें।
कर्नाटक सरकार ने केंद्र के रक्षा मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें बेंगलुरु में कई महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी देने का आग्रह किया गया है। इन मांगों में मुख्य रूप से सड़क विकास और 730 एकड़ के पब्लिक पार्क के लिए रक्षा जमीन का अधिग्रहण शामिल है। यह मामला एक बार फिर घनी आबादी वाले शहरों में विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के संतुलन को सामने ले आया है।
HAL के नियमों में बदलाव की मांग
बेंगलुरु में निर्माण कार्यों के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से जुड़े नियमों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी मांग रखी है। सरकार चाहती है कि एयरपोर्ट से जुड़े ऊंचाई क्लीयरेंस (Height Clearance) के दायरे को 20 किलोमीटर से घटाकर 15 किलोमीटर कर दिया जाए। वर्तमान में जारी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) की प्रक्रिया प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी कर रही है, जिसे सरकार अब और लचीला बनाना चाहती है।
टेस्टिंग फैसिलिटी शिफ्ट करने का प्रस्ताव
इन्फ्रास्ट्रक्चर को जगह देने के लिए राज्य सरकार ने हेलिकॉप्टर टेस्टिंग को बेंगलुरु से हटाकर तुमकुरु की HAL-11 फैसिलिटी में शिफ्ट करने का सुझाव दिया है। अगर यह बदलाव होता है, तो लोअर अगरम से सारजापुर रोड को जोड़ने वाली 24-मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण कार्य आसान हो जाएगा। हालांकि, किसी भी तरह की शिफ्टिंग का असर HAL के ऑपरेशनल फुटप्रिंट पर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।
डिफेंस लैंड से जुड़े प्रोजेक्ट्स अक्सर जटिल ब्यूरोक्रेटिक प्रक्रियाओं के कारण देरी का शिकार होते रहे हैं। मंत्रालय का फैसला न केवल शहरी मोबिलिटी की दिशा तय करेगा, बल्कि प्रोजेक्ट्स की लागत और समय सीमा (Timeline) को भी सीधे प्रभावित करेगा।
