Kalpataru Projects International Limited (KPIL) ने पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में **₹2,225 करोड़** के नए ऑर्डर और लेटर्स ऑफ कंफर्ट हासिल किए हैं। इस नई कामयाबी के साथ ही कंपनी का मौजूदा फाइनेंशियल ईयर का कुल ऑर्डर इनफ्लो **₹20,000 करोड़** को पार कर गया है, जो पिछले साल के मुकाबले **30%** की बढ़त है।
ऑर्डर बुक में जोरदार उछाल
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि नए ऑर्डर्स में से ₹2,031 करोड़ का बड़ा हिस्सा पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट से आया है। इसमें घरेलू और इंटरनेशनल, दोनों प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। वहीं, कंपनी की स्वीडिश सब्सिडियरी, Linjemontage i Grästorp AB ने भी ₹194 करोड़ के ऑर्डर हासिल कर यूरोपीय इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत की है।
क्या है ग्रोथ का गणित?
कुल ₹20,000 करोड़ का इनफ्लो कंपनी के काम करने की रफ्तार को दर्शाता है। 75 देशों में फैली कंपनी अब उन इलाकों पर फोकस कर रही है जहाँ ग्रिड मॉडर्नाइजेशन की भारी मांग है। 30% की यह साल-दर-साल ग्रोथ बताती है कि ग्लोबल मार्केट में कंपनी के EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) एक्सपर्टाइज की भारी डिमांड है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
हालांकि ऑर्डर बुक काफी मजबूत दिख रही है, लेकिन निवेशकों को कुछ 'मॉनिटरएबल्स' पर गौर करना चाहिए।
- लेटर्स ऑफ कंफर्ट: घोषित ऑर्डर्स का एक हिस्सा 'लेटर्स ऑफ कंफर्ट' है, जो पूरी तरह से फाइनल कॉन्ट्रैक्ट्स नहीं होते और इन्हें आगे चलकर फॉर्मलाइज होना बाकी है।
- वर्किंग कैपिटल: EPC सेक्टर की दूसरी कंपनियों की तरह ही, KPIL की फाइनेंशियल सेहत प्रोजेक्ट्स की लागत को कंट्रोल करने और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट पर निर्भर करेगी।
- ग्लोबल रिस्क: इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और जियोपॉलिटिकल रिस्क जैसे फैक्टर एग्जीक्यूशन में देरी पैदा कर सकते हैं।
