KPIL Q3 Results: रेवेन्यू में धमाकेदार उछाल, पर मार्जिन पर दबाव!

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AuthorAditya Rao|Published at:
KPIL Q3 Results: रेवेन्यू में धमाकेदार उछाल, पर मार्जिन पर दबाव!
Overview

Kalpataru Projects International (KPIL) ने Q3 FY26 के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **16.3%** बढ़कर **₹6,665 करोड़** हो गया, वहीं स्टैंडअलोन रेवेन्यू में **20%** की शानदार तेजी आई। हालांकि, कंसोलिडेटेड पैट (PAT) सिर्फ **6.8%** बढ़कर **₹149 करोड़** रहा, क्योंकि ऑपरेटिंग मार्जिन **70 बेसिस पॉइंट्स (bps)** घटकर **7.7%** पर आ गया और एक **₹29.48 करोड़** के एक्सेप्शनल आइटम का भी असर पड़ा।

रेवेन्यू की दौड़ में KPIL, पर प्रॉफिट में आई नरमी

Kalpataru Projects International Limited (KPIL) ने अपने Q3 FY26 के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी ने टॉप-लाइन यानी रेवेन्यू के मामले में दमदार प्रदर्शन किया है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 16.3% बढ़कर ₹6,665.42 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल Q3 FY25 में ₹5,732.48 करोड़ था। वहीं, स्टैंडअलोन रेवेन्यू ग्रोथ तो और भी तेज रही, जो 20.0% बढ़कर ₹5,787.56 करोड़ हो गई।

लेकिन, प्रॉफिटेबिलिटी के मोर्चे पर कहानी थोड़ी मिली-जुली रही। जहां स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 34.2% की बड़ी उछाल आकर ₹211.24 करोड़ पर पहुंचा, वहीं कंसोलिडेटेड PAT में नरमी दिखी और यह 6.8% बढ़कर सिर्फ ₹149.05 करोड़ रहा। इसकी मुख्य वजह कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन में 70 बेसिस पॉइंट्स (bps) की गिरावट है, जो 8.4% से घटकर 7.7% हो गया। नेट प्रॉफिट मार्जिन भी कंसोलिडेटेड स्तर पर 2.4% से गिरकर 2.2% पर आ गया।

इस तिमाही में कंसोलिडेटेड और स्टैंडअलोन दोनों नतीजों में ₹(29.48) करोड़ का एक एक्सेप्शनल आइटम दर्ज किया गया, जिसका मुख्य कारण नए लेबर कोड्स (Labour Codes) का प्रभाव बताया जा रहा है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह एक नॉन-रिकरिंग (non-recurring) आइटम है, जिसने असल ऑपरेटिंग प्रदर्शन पर मार्जिन दबाव को कुछ हद तक कम किया।

9 महीने के नतीजे भी हुए पेश

31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई नौ महीनों की अवधि के लिए, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 27.0% बढ़कर ₹19,365.16 करोड़ हो गया, जबकि PAT में 71.9% की जोरदार उछाल आकर ₹600.03 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, स्टैंडअलोन रेवेन्यू 28.0% और PAT 50.6% बढ़कर ₹611.91 करोड़ रहा।

डेट-टू-इक्विटी में सुधार, पर सब्सिडियरी से जुड़े जोखिम

कंपनी की वित्तीय सेहत में सुधार के संकेत मिले हैं, कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेश्यो घटकर 0.57 रह गया है, जो पिछले साल 0.61 था। डेट सर्विस कवरेज रेश्यो (DSCR) और इंटरेस्ट सर्विस कवरेज रेश्यो (ISCR) में भी कंसोलिडेटेड और स्टैंडअलोन दोनों आधारों पर अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है, जो कंपनी की कर्ज चुकाने की क्षमता को मजबूत दर्शाता है।

हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। सब्सिडियरी Wainganga Expressway Private Limited (WEPL) को NHAI से टर्मिनेशन नोटिस मिले हैं। मैनेजमेंट का मानना है कि इसका कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन ऐसे विवादों में अप्रत्याशित जोखिम छिपे हो सकते हैं। इसके अलावा, Vindhyachal Expressway Private Limited (VEPL) में स्टेक ट्रांसफर और Linjemontage I Grastorp AB (LMG) के शेयरहोल्डिंग स्टेटस में बदलाव पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट के संकेत देते हैं। नए लेबर कोड्स का असर, जिसे एक बार का खर्च बताया गया है, भविष्य में ऑपरेशनल कॉस्ट्स को प्रभावित कर सकता है, जिस पर नजर रखने की जरूरत होगी।

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