📉 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
KPIL ने धमाकेदार नतीजे पेश किए हैं, जिससे बाजार में उत्साह है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 20% का शानदार इजाफा दर्ज किया, जो ₹5,788 करोड़ पर पहुंच गया। इसी अवधि में EBITDA भी 20% बढ़कर ₹481 करोड़ रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 8.3% पर स्थिर बना रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) स्टैंडअलोन आधार पर 34% बढ़कर ₹211 करोड़ हो गया।
अगर हम 9 महीने (9M FY26) की बात करें, तो स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 28% की जोरदार बढ़त के साथ यह ₹16,246 करोड़ हो गया। वहीं, PAT में 51% का भारी उछाल आया और यह ₹612 करोड़ रहा। प्रति शेयर आय (EPS) भी 44% बढ़कर ₹35.8 दर्ज की गई।
कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर भी KPIL का प्रदर्शन शानदार रहा। Q3 FY26 में रेवेन्यू 16% बढ़कर ₹6,665 करोड़ हुआ। जबकि, 9M FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 27% की बढ़त के साथ ₹19,365 करोड़ पर पहुंचा। सबसे खास बात यह है कि 9M FY26 के लिए कंसोलिडेटेड PAT में 72% की जबरदस्त उछाल देखी गई, जो ₹600 करोड़ रहा। कंसोलिडेटेड EPS में भी 60% का इजाफा हुआ और यह ₹35.5 रहा।
इन नतीजों में एक ₹29 करोड़ का एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Item) भी शामिल है, जो नए लेबर कोड्स के लिए प्रोविजन (Provision) के तौर पर दर्ज किया गया है।
🚀 मजबूत बैलेंस शीट और भविष्य की तैयारी
कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंसोलिडेटेड नेट डेट (Net Debt) में 29% की भारी कटौती करते हुए इसे ₹2,240 करोड़ पर ला दिया है। इसके अलावा, नेट वर्किंग कैपिटल (Net Working Capital) में 15 दिनों का सुधार देखा गया है। जनवरी 2026 में कंपनी ने अपनी विंध्याचल रोड एसेट (Vindhyachal Road Asset) को लगभग ₹799 करोड़ में बेचा, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।
KPIL के पास भविष्य की ग्रोथ के लिए एक मजबूत ऑर्डर बुक (Order Book) है, जिसकी कुल वैल्यू ₹63,287 करोड़ है। कंपनी ने जनवरी 2026 में ही ₹1,782 करोड़ के नए आर्डर हासिल किए हैं, जबकि इस फाइनेंशियल ईयर (YTD) में कुल ₹19,456 करोड़ के आर्डर मिले हैं। यह मजबूत ऑर्डर बुक अगले कुछ समय के लिए रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी (Visibility) देती है।
🚩 आगे क्या?
कंपनी का मैनेजमेंट भविष्य में ग्रोथ को बनाए रखने और मार्जिन सुधारने को लेकर काफी आश्वस्त है। KPIL अपने डाइवर्सिफाइड बिजनेस मिक्स, ग्लोबल कैपेबिलिटीज और मजबूत बैलेंस शीट के दम पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेक्टर में अच्छी पोजीशन में है। हालांकि, EPC सेक्टर में एग्जीक्यूशन (Execution) से जुड़ी चुनौतियां, प्रोजेक्ट में देरी, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे रिस्क (Risk) बने रहते हैं।