घटते मुनाफे के बीच मिली ₹1734 करोड़ की डील!
KNR Constructions के निवेशकों के लिए आज मिली-जुली खबरें सामने आई हैं। एक तरफ जहां कंपनी को ₹1,734 करोड़ का एक बड़ा प्रोजेक्ट हाथ लगा है, वहीं दूसरी ओर उसके तीसरी तिमाही के नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 58.7% की भारी गिरावट के साथ ₹102.8 करोड़ पर आ गया है। इस दौरान, कंपनी का रेवेन्यू भी 12.4% घटकर ₹743.2 करोड़ रहा।
मार्जिन पर दबाव, शेयर में लगातार गिरावट
परिचालन लागत बढ़ने और मार्जिन पर दबाव के चलते, EBITDA मार्जिन में भी भारी गिरावट देखी गई है। यह पिछले साल के 30.1% से घटकर सिर्फ 22.4% रह गया है। इन कमजोर नतीजों और मार्जिन संकुचन के चलते, कंपनी का शेयर साल-दर-साल 50% से अधिक टूट चुका है और अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर के करीब बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का वैल्यूएशन भी पीयर ग्रुप की तुलना में काफी सस्ता है, जिसका P/E रेशियो 6.6x और P/B रेशियो 0.67x है, जबकि इंडस्ट्री औसत काफी ऊपर है।
नए प्रोजेक्ट से उम्मीदें, पर जोखिम भी बरकरार
कंपनी को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की ओर से तेलंगाना में NH-167 के 80 किमी लंबे फोर-लेनिंग प्रोजेक्ट का लेटर ऑफ अवार्ड मिला है। फरवरी 2026 तक कंपनी के पास लगभग ₹8,849 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जिसमें से ₹5,300 करोड़ के काम अगले दो सालों में होने की उम्मीद है। कंपनी अपनी HAM संपत्तियों को बेचकर ₹1,543 करोड़ जुटाने की भी योजना बना रही है।
हालांकि, कंपनी के सामने कई जोखिम भी हैं। तेलंगाना सिंचाई परियोजनाओं से ₹1,430 करोड़ (बिना बिल वाली रकम सहित) के बड़े प्राप्य (Receivables) फंसे हुए हैं। इसके अलावा, तमिलनाडु में ₹2,163 करोड़ के एक प्रोजेक्ट पर कानूनी अड़चनें हैं। कंपनी पहले भी MoRTH द्वारा ब्लैकलिस्टिंग का सामना कर चुकी है, जो बाज़ार में उसके भरोसे को कमजोर करता है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है, ज्यादातर 'होल्ड' रेटिंग दे रहे हैं, लेकिन कुछ 'सेल' रेटिंग की ओर बढ़ रहे हैं। मैनेजमेंट का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 26 में रेवेन्यू करीब ₹2,000 करोड़ और EBITDA मार्जिन 9-10% के आसपास रहेगा। कंपनी को FY28 तक ही बड़ी रिकवरी की उम्मीद है।