नंबर्स ने चौंकाया, मार्जिन पर भारी दबाव!
KNR Constructions के लिए Q3 FY26 के नतीजे उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट 58.7% लुढ़ककर सिर्फ ₹102.8 करोड़ रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹248.6 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू भी 12.4% घटकर ₹743.2 करोड़ पर आ गया। इन आंकड़ों के पीछे सबसे बड़ी वजह ऑपरेशनल कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी और मार्जिन पर पड़ा जबरदस्त दबाव है।
EBITDA में भारी गिरावट, मार्जिन सिकुड़े
असल में, कंपनी के EBITDA में 34.8% की भारी गिरावट आई, जो ₹166.7 करोड़ पर पहुंच गया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि EBITDA मार्जिन 770 बेस पॉइंट्स सिकुड़कर 22.4% पर आ गया, जबकि एक साल पहले यह 30.1% था। यह साफ संकेत है कि कंपनी को इनपुट कॉस्ट (जैसे कच्चा माल, लेबर) या फिर प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले मार्जिन में तगड़ा झटका लगा है।
नया प्रोजेक्ट भी नहीं बचा पाया शेयर को
इस खराब फाइनेंशियल परफॉरमेंस के बीच, KNR Constructions के लिए एक अच्छी खबर यह थी कि उन्हें हैदराबाद में एक आइकॉनिक ब्रिज बनाने का ₹319.24 करोड़ का नया ऑर्डर मिला। लेकिन, बाजार ने इस पॉजिटिव खबर को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। 5 फरवरी 2026 को KNR Constructions के शेयर 3.62% की गिरावट के साथ ₹148.85 पर बंद हुए। इस दौरान लगभग 25 लाख शेयरों का कारोबार हुआ, जो दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा खराब नतीजों के कारण बुरी तरह डगमगा गया है।
वैल्यूएशन और प्रतिस्पर्धियों से तुलना
कंपनी का मौजूदा P/E Ratio 25.5x और मार्केट कैप ₹14,850 करोड़ है। जब कंपनी के प्रॉफिट और मार्जिन लगातार गिर रहे हैं, तो ऐसे में मौजूदा वैल्यूएशन पर सवाल उठना लाजिमी है। खासकर जब सेक्टर की दूसरी कंपनियां बेहतर कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, HG Infra Engineering ने रेवेन्यू में 15% का इजाफा दिखाया है और मार्जिन भी सुधारे हैं, जबकि PNC Infratech ने करीब 18% पर मार्जिन स्थिर रखे हैं।
एनालिस्ट्स की राय और भविष्य की राह
बाजार विश्लेषकों (Analyst) की राय भी अब KNR Constructions के प्रति नरम पड़ गई है। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई ब्रोकरेज हाउसेज ने स्टॉक पर अपनी रेटिंग घटाकर 'होल्ड' कर दी है और टारगेट प्राइस में 5-10% की कटौती की है। यह स्थिति पिछले साल की याद दिलाती है, जब इसी तरह के मार्जिन दबाव के कारण शेयर में नरमी देखी गई थी। अब KNR Constructions के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे कैसे बढ़ती लागत को मैनेज करते हैं और प्रोजेक्ट्स को अधिक लाभप्रद तरीके से पूरा करते हैं, ताकि निवेशकों का विश्वास वापस जीता जा सके। जब तक ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार और मार्जिन रिकवरी के ठोस संकेत नहीं मिलते, तब तक यह स्टॉक दबाव में रह सकता है।
