KMEW का दमदार प्रदर्शन: शिपबिल्डिंग में एंट्री और टैक्स बचत से मुनाफे में उछाल
Knowledge Marine & Engineering Works Limited (KMEW) ने Q3 FY26 में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 56% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ ₹90 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 43% पर पहुंच गई।
शिपबिल्डिंग में बड़ा कदम और नए ऑर्डर
कंपनी ने कमर्शियल शिपबिल्डिंग सेगमेंट में सफलतापूर्वक प्रवेश किया है। इसने इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) से ₹230 करोड़ के ऑर्डर हासिल किए हैं। इसके अलावा, 15 साल के एक महत्वपूर्ण ग्रीन टग कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी वैल्यू ₹700 करोड़ है।
मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की राह
KMEW के पास अब कुल ₹1,500 करोड़ की ऑर्डर बुक है। कंपनी के पास ₹3,000 करोड़ से अधिक के और ऑर्डर पाइपलाइन में हैं। कंपनी की फ्लीट यूटिलाइजेशन 100% बनी हुई है, जो इसके मजबूत परिचालन का संकेत है।
टैक्स का नया गेम-चेंजर
कंपनी के लिए एक बड़ी रणनीतिक खबर यह है कि उसने टनेज टैक्स स्कीम (tonnage tax scheme) को अपनाया है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि इससे कंपनी की प्रभावी टैक्स दर टर्नओवर के 1% से भी काफी कम हो जाएगी, जो सीधे तौर पर मुनाफे को बढ़ाएगी।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
कमर्शियल शिपबिल्डिंग में उतरना KMEW के लिए एक बड़ा कदम है। इससे कंपनी के रेवेन्यू के स्रोत सिर्फ ड्रेजिंग और मरीन ऑपरेशन्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि एक नया और बड़ा जरिया खुल जाएगा। ग्रीन टग्स जैसे लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स कंपनी को रेवेन्यू की निश्चितता और बेहतर मार्जिन का भरोसा देते हैं।
टननेज टैक्स का फायदा कंपनी के नेट प्रॉफिट मार्जिन को सीधे तौर पर बढ़ाएगा और कैश फ्लो को मजबूत करेगा, जिसे भविष्य में निवेश या कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। मजबूत ऑर्डर बुक और पूरी फ्लीट यूटिलाइजेशन के साथ, कंपनी अपनी शिपयार्ड विस्तार योजना के तहत अगले तीन साल में ₹500-700 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
पृष्ठभूमि (जमीनी हकीकत)
सितंबर 2025 में, KMEW ने ₹284.81 करोड़ की एक प्रेफरेंशियल इश्यू पूरी की थी। इस फंड का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल (₹30.81 करोड़), जहाजों की खरीद/निर्माण के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (₹183 करोड़) और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों (₹71 करोड़) के लिए किया जाना है। कंपनी हाल ही में BSE SME प्लेटफॉर्म से BSE और NSE के मेन बोर्ड में माइग्रेट हुई है, जिससे उसकी निवेशक पहुंच और विश्वसनीयता बढ़ी है।
अब क्या बदलेगा?
शेयरहोल्डर्स अब KMEW से कमर्शियल शिपबिल्डिंग से बढ़ते रेवेन्यू की उम्मीद कर सकते हैं। टनेज टैक्स स्कीम से टैक्स का बोझ काफी कम होने और बॉटम-लाइन प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार आने की संभावना है। कंपनी ₹100 करोड़ का निवेश शिपयार्ड सुविधाओं में करेगी और अगले तीन साल में बेड़े के विस्तार के लिए ₹183 करोड़ का कैपेक्स भी करेगी। मैनेजमेंट का लक्ष्य प्राप्तियों के दिनों (receivable days) को वर्तमान 45-60 दिनों से घटाकर 30-45 दिनों तक लाना है।
जोखिम जिन पर नजर रखें
बहरीन प्रोजेक्ट का संचालन फिलहाल रोक दिया गया है क्योंकि जहाज को अधिक मुनाफे वाले भारतीय कॉन्ट्रैक्ट्स में पुनः तैनात किया जाना है, जिससे इस खंड में कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।
प्रतिद्वंदियों से तुलना
KMEW शिपबिल्डिंग में विस्तार कर रही है, जहां Cochin Shipyard Ltd और Garden Reach Shipbuilders & Engineers Ltd (GRSE) जैसी कंपनियां प्रमुख हैं। ड्रेजिंग के क्षेत्र में, KMEW को Dredging Corporation of India (DCI) जैसी स्थापित कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
प्रासंगिक आंकड़े (समय-आधारित)
Q3 FY26 में KMEW का रेवेन्यू ₹90 करोड़ रहा, जो Q3 FY25 के ₹57.6 करोड़ से 56% अधिक है। कंसोलिडेटेड PAT 110.5% बढ़कर ₹328.94 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹156.23 करोड़ था।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशक नए कमर्शियल शिपबिल्डिंग सेगमेंट के सफल एकीकरण और प्रदर्शन पर नजर रखेंगे। बहरीन प्रोजेक्ट के संचालन को फिर से शुरू करने की प्रगति महत्वपूर्ण होगी। शिपबिल्डिंग और ग्रीन टग्स में नए ऑर्डर का आना भविष्य के विकास का एक प्रमुख संकेktur होगा। टनेज टैक्स स्कीम के तहत वास्तविक कर बचत और शुद्ध मार्जिन पर इसके प्रभाव को करीब से देखने की आवश्यकता होगी।