भारत में जिस रफ्तार से डेटा सेंटर (Data Center) का जाल बिछाया जा रहा है, वह इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक बड़ी कमाई का रास्ता खोल रहा है। अनुमान है कि यह सिर्फ केबल और वायर इंडस्ट्री के लिए ही ₹25,000 करोड़ का बड़ा अवसर पैदा करेगा। KEI Industries, जो पहले से ही डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, इस बूम का बड़ा फायदा उठाने की स्थिति में है। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच सालों में 20% की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से ग्रोथ हासिल करना है।
सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक 8-10 गीगावाट (GW) डेटा सेंटर क्षमता खड़ा करना है, जिसमें करीब $30-35 बिलियन का भारी निवेश होगा। इस कुल खर्च का 3-5% हिस्सा केबल और वायर के लिए अनुमानित है, जो प्रति गीगावाट लगभग ₹3,500 से ₹4,000 करोड़ का केबल डिमांड तैयार करेगा। KEI Industries के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, अनिल गुप्ता के अनुसार, कंपनी इस मौके से ₹2,500 से ₹3,000 करोड़ तक की कमाई कर सकती है। डेटा सेंटरों का मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय इलाकों में होना, हाई-वोल्टेज और रेडंडेंट कनेक्टिविटी की मांग को और बढ़ाएगा, जो KEI की मुख्य पेशकश है।
वित्तीय सेहत की बात करें तो KEI Industries काफी मजबूत दिखती है। कंपनी पर कर्ज का बोझ बहुत कम है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो करीब 0.03-0.04 है। वहीं, इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी शानदार 16.83% के आसपास है। लेकिन, निवेशकों को कंपनी के शेयर के वैल्यूएशन (Valuation) पर खास ध्यान देने की जरूरत है। KEI का मौजूदा प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 50-55x है, जो इंडस्ट्री एवरेज 42.93x और पियर कंपनी Finolex Cables (P/E ~18x) व Polycab India (P/E ~44-46x) से काफी ज्यादा है। यह प्रीमियम वैल्यूएशन बताता है कि बाजार पहले से ही कंपनी की भविष्य की ग्रोथ को काफी हद तक कीमत में शामिल कर चुका है।
इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा (Competition) भी लगातार बढ़ रही है। Polycab India, Havells जैसी कंपनियां और नए खिलाड़ी तेजी से मार्केट में अपनी जगह बना रहे हैं। KEI Industries का केबल और वायर सेगमेंट में 11-13% का मार्केट शेयर इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दबाव में है। हाल ही में, कई विश्लेषकों (Analysts) ने भी अपने रेटिंग को 'Strong Buy' से घटाकर 'Buy' कर दिया है, जो बाजार के थोड़े सतर्क रुख का संकेत है।
इसके अलावा, कंपनी का रेवेन्यू ग्रोथ काफी हद तक डेटा सेंटर जैसे एक ही सेक्टर पर निर्भर करता है, जो एक तरह का कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) पैदा करता है। कॉपर और एल्युमीनियम जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी इंडस्ट्री के लिए एक स्वाभाविक जोखिम है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले पांच सालों में KEI का रेवेन्यू ग्रोथ (14.87%) इंडस्ट्री एवरेज (16.21%) से थोड़ा कम रहा है और मार्केट शेयर में भी कुछ कमी आई है।
इन चिंताओं के बावजूद, ज्यादातर विश्लेषकों का नजरिया अभी भी पॉजिटिव है और वे 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं। KEI Industries के लिए औसत 12 महीने का प्राइस टारगेट करीब ₹4,728 से ₹4,857 के बीच है, जबकि JPMorgan जैसे कुछ विश्लेषकों ने इसे ₹5,250 तक का लक्ष्य दिया है। कंपनी खुद अगले चार से पांच सालों में 20% की CAGR ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। हालांकि, यह ग्रोथ सस्टेन करना और मौजूदा 50x से ऊपर के P/E को सही ठहराना मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
