Q4 नतीजों ने झटका, शेयर 11% से ज्यादा लुढ़का
KEC International के लिए चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹268 करोड़ की तुलना में 28% घटकर ₹193 करोड़ रह गया। वहीं, रेवेन्यू में भी 7% की गिरावट आई और यह ₹6,390 करोड़ पर आ गया। इस निराशाजनक प्रदर्शन का सीधा असर स्टॉक पर दिखा, जो 11% से ज्यादा की भारी गिरावट के साथ ₹487.65 के स्तर पर आ गया।
मिडिल ईस्ट टेंशन और एग्जीक्यूशन की दिक्कतें बनीं वजह
इस गिरावट की मुख्य वजहें मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और कंपनी की एग्जीक्यूशन (Execution) से जुड़ी आंतरिक समस्याएं बताई जा रही हैं। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता ने न केवल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, बल्कि कंपनी के इंटरनेशनल बिजनेस पर भी दबाव डाला है। इसी तरह के भू-राजनीतिक झटकों ने पहले भी कंपनी के स्टॉक को प्रभावित किया था।
एनालिस्ट्स की राय बंटी: 'BUY' या 'ADD'?
कमजोर नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्मों की राय बंटी हुई है। Emkay Global Financial Services ने अपनी रेटिंग को 'BUY' से घटाकर 'ADD' कर दिया है और टारगेट प्राइस को 31% कम करके ₹600 कर दिया है। फर्म ने वेस्ट एशिया में सप्लाई चेन की दिक्कतें, लेबर की कमी और बढ़ते कर्ज को प्रमुख चिंताएं बताया है। वहीं, Elara Securities ने 'BUY' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस को ₹700 रखा है। Elara का मानना है कि मिडिल ईस्ट में शिपमेंट में देरी से ₹3-4 बिलियन का रेवेन्यू नुकसान हुआ, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए 12-15% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान और ऑर्डर में 110% की बढ़ोतरी भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
₹40,000 करोड़ से ज्यादा की ऑर्डर बुक भविष्य की उम्मीद
इन सब छोटी-मोटी दिक्कतों के बावजूद, KEC International के पास एक मजबूत ऑर्डर बुक है जो भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में रिकॉर्ड ₹25,280 करोड़ का नया ऑर्डर हासिल किया है। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी की कुल ऑर्डर बुक ₹36,267 करोड़ की हो गई है, और सबसे कम बोली लगाने वाले (Lowest Bidder) के रूप में ₹40,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स कंपनी के पास हैं। यह बड़ा बैकलॉग भविष्य में रेवेन्यू की स्पष्ट तस्वीर दिखाता है, खासकर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) सेगमेंट में, जो अब रेवेन्यू का 68% है।
कर्ज, मार्जिन और मिडिल ईस्ट रिस्क पर चिंताएं
हालांकि, कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ा है और नेट वर्किंग कैपिटल की जरूरतें भी ज्यादा हैं। इनपुट लागतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनी मार्जिन पर दबाव का सामना कर रही है। Q4 में EBITDA मार्जिन घटकर 7.0% रह गया, जो पिछले साल 7.8% था। मिडिल ईस्ट का जोखिम भी बड़ा है, क्योंकि ऑर्डर बुक का लगभग 20% इसी क्षेत्र से जुड़ा है, और वहां जारी अस्थिरता एग्जीक्यूशन और रेवेन्यू को प्रभावित कर सकती है।
भविष्य का रास्ता: एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
कुल मिलाकर, KEC International का भविष्य मिला-जुला दिख रहा है। जहां एक ओर कमजोर तिमाही नतीजे और भू-राजनीतिक जोखिम चिंताएं बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मजबूत ऑर्डर बुक और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग भविष्य में ग्रोथ की राह खोल सकती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में कंपनी के एग्जीक्यूशन में सुधार और भू-राजनीतिक शांति स्टॉक को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।