कंपनी के नतीजे: बढ़त के साथ चिंताएं भी
KEC International ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए अपने वित्तीय नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी ने रेवेन्यू ग्रोथ में दमदार परफॉरमेंस दिखाई है, लेकिन साथ ही कंपनी पर कर्ज़ का बोझ भी बढ़ा है।
मुख्य आंकड़े:
- तिमाही में रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 12% बढ़कर ₹6,001 करोड़ रहा।
- EBITDA में 15% का जोरदार उछाल आया और यह ₹430 करोड़ दर्ज किया गया। EBITDA मार्जिन सुधरकर 7.2% हो गया, जो पिछले साल 7.0% था।
- ऑपरेटिंग PAT (Profit After Tax) में 32% की शानदार वृद्धि हुई और यह ₹171 करोड़ रहा। PAT मार्जिन भी बढ़कर 2.9% हो गया, जो पिछले साल 2.4% था।
- पहले नौ महीनों (9M FY26) में, रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹17,116 करोड़ रहा और EBITDA में 22% की बढ़त के साथ यह ₹1,211 करोड़ पर पहुंच गया।
- नए लेबर कोड के चलते ₹59 करोड़ का एक एक्सेप्शनल एक्सपेंस (Exceptional Expense) भी बुक किया गया है।
कमाई के मुख्य स्रोत:
कंपनी के रेवेन्यू में हुई यह वृद्धि मुख्य रूप से ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) सेगमेंट से आई है, जहाँ रेवेन्यू में 31% की ज़बरदस्त उछाल के साथ यह ₹4,161 करोड़ तक पहुंच गया। इसके अलावा, केबल्स और कंडक्टर्स बिजनेस से भी 37% की बढ़ोतरी के साथ ₹556 करोड़ का रेवेन्यू आया। हालांकि, सिविल, ट्रांसपोर्टेशन, ऑयल एंड गैस और रिन्यूएबल्स जैसे कुछ दूसरे सेगमेंट्स में इस तिमाही में रेवेन्यू में गिरावट देखी गई।
कर्ज़ और वर्किंग कैपिटल की चिंता:
एक बड़ा पॉइंट जिस पर निवेशकों की नज़र है, वह है कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट डेट (Net Debt)। यह बढ़कर ₹6,806 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹5,574 करोड़ था। कंपनी का मैनेजमेंट इस बढ़ोतरी की वजह आक्रामक रेवेन्यू ग्रोथ, स्ट्रैटेजिक इन्वेंट्री बिल्ड-अप, वॉटर प्रोजेक्ट्स में देरी से भुगतान और कुछ बड़ी कलेक्शंस का अगले पीरियड में जाना बता रहा है। मैनेजमेंट का कहना है कि मार्च 2026 तक डेट लेवल सामान्य हो जाएंगे। इसके अलावा, नेट वर्किंग कैपिटल (NWC) डेज़ भी बढ़कर 135 दिन हो गए हैं, जो पिछले साल 129 दिन थे। यह कैश फ्लो पर थोड़ा दबाव दर्शाता है, हालांकि सुधार के प्रयास जारी हैं।
की रेश्यो और कैश फ्लो:
कर्ज़ बढ़ने के बावजूद, सेल्स के प्रतिशत के तौर पर इंटरेस्ट एक्सपेंस (Interest Expenses) मामूली घटकर Q3 और 9M FY26 दोनों में 2.9% रहा, जबकि पिछले साल यह 3.2% और 3.3% था। हालांकि, ऑपरेटिंग कैश फ्लो के विशिष्ट आंकड़े विस्तृत तौर पर नहीं दिए गए हैं, लेकिन मैनेजमेंट की टिप्पणियों से पता चलता है कि डेट की बढ़ोतरी वर्किंग कैपिटल के दबाव से जुड़ी है।
🚀 नए ऑर्डर्स और विस्तार
KEC International ने एक बड़ा रिकॉर्ड ऑर्डर हासिल किया है, जो भारत के ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर है। इसकी वैल्यू लगभग ₹1,050 करोड़ है। मिडिल ईस्ट और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में मिले बड़े ऑर्डर्स के साथ, कंपनी T&D में अपनी लीडरशिप को और मजबूत कर रही है।
खास बात यह है कि कंपनी ने विंड एनर्जी सेगमेंट में भी एंट्री की है, जहाँ उसे 100+ MW का एक प्रोजेक्ट ऑर्डर मिला है। इसके अलावा, KAVACH (TCAS) के तहत ट्रेन कोलिजन अवॉयडेंस सिस्टम और एक इंटरनेशनल पाइपलाइन लेइंग प्रोजेक्ट के लिए मिले ऑर्डर्स ने इसके ऑर्डर बुक को और मजबूत किया है। कंपनी का ऑर्डर बुक और L1 पोजीशन (अगला सबसे बड़ा बोलीदाता) मिलाकर अब ₹41,000 करोड़ से अधिक है।
🚩 जोखिम और भविष्य की राह
मैनेजमेंट भविष्य में ग्रोथ को लेकर उम्मीद से भरा है। उन्हें इंटरनेशनल T&D अवसरों, भारतीय T&D सेक्टर की तेजी, रियल एस्टेट में अपसाइकिल, प्राइवेट कैपेक्स में रिकवरी और रिन्यूएबल्स व सुरक्षा प्रणालियों (TCAS) पर सरकारी फोकस से मजबूत संकेत मिल रहे हैं।
हालांकि, कुछ जोखिम भी मौजूद हैं, जैसे लेबर की संभावित कमी, ट्रांसपोर्टेशन सेगमेंट में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की चुनौतियां और बढ़ती प्रतिस्पर्धा। वॉटर प्रोजेक्ट्स में भुगतान में देरी के कारण धीमी प्रगति भी वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मैनेजमेंट मार्च 2026 तक डेट लेवल्स को कैसे सामान्य करता है।