Johnson Lifts का बड़ा दांव: चेन्नई के पास ₹325 करोड़ का निवेश, हाई-स्पीड लिफ्ट का होगा प्रोडक्शन!

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Johnson Lifts का बड़ा दांव: चेन्नई के पास ₹325 करोड़ का निवेश, हाई-स्पीड लिफ्ट का होगा प्रोडक्शन!
Overview

निजी कंपनी Johnson Lifts चेन्नई के पास **39 एकड़** में **₹325 करोड़** का बड़ा निवेश कर रही है। इस विस्तार से कंपनी अपनी हाई-स्पीड लिफ्ट के प्रोडक्शन को बढ़ाने की तैयारी में है। इसका मकसद प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाना, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से निपटना और **₹4,000 करोड़** के सालाना रेवेन्यू लक्ष्य को हासिल करना है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

प्रोडक्शन क्षमता में ज़बरदस्त बढ़ोतरी

India के वर्टिकल मोबिलिटी मार्केट में बढ़ती कॉम्पिटिशन को देखते हुए Johnson Lifts ने चेन्नई के पास Sengadu में 39 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया है। कंपनी इस नई फैसिलिटी के पहले फेज में ₹200 करोड़ का निवेश कर रही है। इसका लक्ष्य हाई-स्पीड लिफ्ट मैन्युफैक्चरिंग में लीडर बनना है। जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है और ऊंची इमारतें बन रही हैं, इस विस्तार की ज़रूरत और भी अहम हो गई है।

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से कैसे निपटेगी कंपनी?

मेट्रो प्रोजेक्ट्स और रियल एस्टेट डेवलपमेंट से ज़बरदस्त डिमांड के बावजूद, Johnson Lifts को कॉपर और स्टील जैसे ज़रूरी मटीरियल की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी और अलग-अलग बिज़नेस वाली कंपनियों के विपरीत, Johnson Lifts, जिसका 92% बिज़नेस नई इंस्टॉलेशन्स से आता है, इन बढ़ती लागतों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील है। कंपनी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स पर फिर से बातचीत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों के कारण यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

कॉम्पिटिशन में कहां है कंपनी?

कंपनी के पास इंडिया के मेट्रो रेल एस्केलेटर सेक्टर में 50% मार्केट शेयर है और यह बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स हासिल करती है। हालांकि, इसे KONE, Otis और Schindler जैसे ग्लोबल प्लेयर्स से कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ता है। इन कंपनियों के पास ज़्यादा बड़ा R&D और डाइवर्सिफाइड सर्विस रेवेन्यूज़ का फायदा है। Johnson Lifts का फोकस नए इक्विपमेंट सप्लाई पर होने के कारण, उसे कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए लगातार अपनी प्रोडक्शन स्केल को बढ़ाना होगा।

फ्यूचर ग्रोथ की स्ट्रेटेजी

नई फैसिलिटी का कंस्ट्रक्शन 2028 में शुरू होने की उम्मीद है। इसका मकसद हाई-स्पीड लिफ्ट प्रोडक्शन को सेंट्रलाइज करना और ऑपरेशन्स को ऑप्टिमाइज़ करना है। यह विस्तार Johnson Lifts के ₹4,000 करोड़ के सालाना रेवेन्यू के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद ज़रूरी है। कंपनी इस ग्रोथ को अपने इंटरनल सेविंग्स से फंड करने की योजना बना रही है, ताकि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और वोलेटाइल कमोडिटी प्राइसेस और डेवलपर की मांगों को मैनेज करने के बीच संतुलन बनाया जा सके।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.