Jindal Steel: Q3 में बंपर कमाई! Revenue **12%** बढ़ा, पर कंपनी को लगा **₹350 Cr** का झटका

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AuthorMehul Desai|Published at:
Jindal Steel: Q3 में बंपर कमाई! Revenue **12%** बढ़ा, पर कंपनी को लगा **₹350 Cr** का झटका
Overview

Jindal Steel Limited ने Q3FY26 में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड ग्रॉस रेवेन्यू तिमाही-दर-तिमाही **12%** बढ़कर **₹15,172 करोड़** पर पहुंच गया, जिसकी मुख्य वजह सेल्स वॉल्यूम में **22%** की जबरदस्त बढ़ोतरी रही। हालांकि, एक बार की **₹350 करोड़** की लागत के कारण रिपोर्टेड EBITDA पर थोड़ा असर पड़ा, लेकिन कंपनी का भविष्य मजबूत दिख रहा है।

दमदार प्रदर्शन के बावजूद EBITDA पर पड़ा एकमुश्त लागत का असर

Jindal Steel & Power Limited (JSPL) ने Q3FY26 में अपने नतीजों से बाजार को प्रभावित किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड ग्रॉस रेवेन्यू पिछले क्वार्टर की तुलना में 12% की छलांग लगाते हुए ₹15,172 करोड़ दर्ज किया गया। इस शानदार ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण सेल्स वॉल्यूम में 22% की भारी बढ़ोतरी रही, जो 2.28 मिलियन टन तक पहुंच गई। वहीं, कुल प्रोडक्शन भी 25% बढ़कर 2.51 मिलियन टन रहा।

हालांकि, कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA ₹1,593 करोड़ रहा, जिसकी मार्जिन 10.5% रही। यह नंबर इसलिए थोड़ा कम दिख रहा है क्योंकि इसमें ₹350 करोड़ का एक बड़ा एकमुश्त (one-time) BF2 स्टार्ट-अप कॉस्ट शामिल है। यदि इस लागत को हटा दिया जाए, तो कंपनी का अंडरलाइंग EBITDA प्रति टन ₹8,516 रहा, जो काफी मजबूत माना जा रहा है। इस तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹189 करोड़ रहा।

कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि ब्लेंडेड स्टील नेट सेल्स रियलाइजेशन (NSR) में प्रति टन करीब ₹3,000 की गिरावट देखी गई। इसके पीछे प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव, जिसमें कम रियलाइजेशन वाले हॉट रोल्ड कॉइल (HRC) का हिस्सा बढ़ना, बाय-प्रोडक्ट्स का बढ़ा हुआ कैप्टिव कंजम्पशन और कोक ओवन प्लांट की देरी से कमीशनिंग जैसे कारण थे। वहीं, कोकिंग कोल की इनपुट कॉस्ट में मामूली $2 प्रति टन की बढ़ोतरी हुई, जो कंपनी के अनुमान से कम रही।

विस्तार की ओर बढ़ती कंपनी और मजबूत Q4 की उम्मीद

JSPL ने इस तिमाही में कई अहम ऑपरेशनल कदम उठाए हैं। एक्वायर किए गए पावर प्लांट के लिए स्टील बाय-प्रोडक्ट प्लांट (SBPP) मॉड्यूल 1 (525 MW) की कमीशनिंग और मॉड्यूल 2 (525 MW) का सिंक्रोनाइजेशन एक बड़ा टर्नअराउंड है। इसके अलावा, 0.2 MTPA का CCL1 प्लांट जनवरी 2026 में चालू हो गया है, जिससे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ है। उत्कल बी1 माइन अब ऑपरेशनल है, और 3 MTPA बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस 3 (BOF 3) अंगुल में Q4FY26 तक चालू होने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी की कुल स्टीलमेकिंग कैपेसिटी बढ़कर 15.6 MTPA हो जाएगी।

मैनेजमेंट Q4FY26 को लेकर काफी आश्वस्त है। उन्हें उम्मीद है कि बेहतर स्टील रियलाइजेशन और डिमांड की स्थिति के कारण प्रदर्शन में काफी सुधार दिखेगा। दिसंबर 2025 के मध्य से डोमेस्टिक स्टील प्राइस में ₹3,000-₹3,500 प्रति टन की रिकवरी देखी गई है। हालांकि, Q4FY26 में कोकिंग कोल की कंजम्पशन कॉस्ट में $18-$20 प्रति टन की क्रमिक बढ़ोतरी का अनुमान है।

फ्यूचर की राह और रिस्क फैक्टर्स

प्रोडक्ट मिक्स में हुए बदलाव पर मैनेजमेंट का कहना है कि HRC का अस्थायी बढ़ाया गया प्रोडक्शन रैंप-अप फेज में प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक स्ट्रेटेजिक कदम था। कंपनी वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स का अनुपात बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी अपने नेट डेट/EBITDA को 1.5x के लक्षित स्तर तक लाने के लिए लगातार काम कर रही है।

Q3FY26 में कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) ₹2,076 करोड़ रहा, जिससे वर्तमान विस्तार प्रोग्राम के लिए कुल CAPEX ₹32,925 करोड़ तक पहुंच गया है, जो घोषित कुल ₹47,043 करोड़ का हिस्सा है। 31 दिसंबर 2025 तक, कंसोलिडेटेड नेट डेट ₹15,443 करोड़ था, जिससे नेट डेट टू EBITDA रेशियो 1.72x रहा। JSPL को उम्मीद है कि प्रोडक्शन बढ़ने और जेनरेटेड कैश फ्लो से यह रेशियो 1.5x से नीचे चला जाएगा। कंपनी प्रोडक्टिविटी और एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए AI और डिजिटलाइजेशन में भी निवेश कर रही है। सस्टेनेबिलिटी पर भी कंपनी का फोकस है, जैसा कि S&P ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ईयरबुक 2026 में इसके शामिल होने से पता चलता है।

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