Jindal Steel Share: प्रोडक्शन रिकॉर्ड पर, पर मुनाफे (Profit) में **80%** की सेंध! शेयर पर क्यों मंडराया संकट?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Jindal Steel Share: प्रोडक्शन रिकॉर्ड पर, पर मुनाफे (Profit) में **80%** की सेंध! शेयर पर क्यों मंडराया संकट?
Overview

Jindal Steel के लिए Q3FY26 का नतीजा मिला-जुला रहा। कंपनी ने प्रोडक्शन और सेल्स वॉल्यूम के मामले में रिकॉर्ड बनाया, लेकिन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में **80.1%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इनपुट लागत में बढ़ोतरी और स्टील की कीमतों में नरमी ने कंपनी के मार्जिन पर भारी दबाव डाला। इस दौरान कंपनी पर कर्ज भी बढ़कर **₹15,443 करोड़** हो गया, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

Jindal Steel (JSW Steel) ने Q3FY26 में प्रोडक्शन और सेल्स के मोर्चे पर भले ही रिकॉर्ड कायम किया हो, लेकिन कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता (Profitability) बुरी तरह प्रभावित हुई है।

प्रोडक्शन में रिकॉर्ड, मुनाफे में सेंध

कंपनी ने 2.51 मिलियन टन (MT) क्रूड स्टील का प्रोडक्शन किया, जो पिछले क्वार्टर से 25% और पिछले साल की इसी अवधि से 26% ज्यादा है। वहीं, सेल्स वॉल्यूम भी 2.28 MT के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जिसमें 22% QoQ और 20% YoY की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वजह से कंपनी का कंसोलिडेटेड ग्रॉस रेवेन्यू (Consolidated Gross Revenue) भी ₹15,172 करोड़ तक पहुंच गया, जो 10.7% YoY की बढ़ोतरी दर्शाता है।

मार्जिन पर ज़बरदस्त दबाव

लेकिन, इन शानदार वॉल्यूम के बावजूद, कंपनी का एडजस्टेड EBITDA (Adjusted EBITDA) 25.3% YoY घटकर ₹1,593 करोड़ रह गया। प्रति टन EBITDA (EBITDA per ton) में भारी गिरावट आई, जो ₹6,981 पर आ गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹11,209 थी। इसका सीधा असर प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पर पड़ा, जो 80.1% YoY लुढ़क कर सिर्फ ₹189 करोड़ रह गया। मैनेजमेंट की मानें तो इनपुट कॉस्ट (Input Costs) का बढ़ना और स्टील की कीमतों में नरमी इसकी मुख्य वजह रही।

कर्ज की चिंता बढ़ी, लेवरेज लक्ष्य चूका

सबसे बड़ा सवाल कंपनी पर बढ़ते कर्ज को लेकर है। Q3FY26 के अंत तक कंपनी का नेट डेट (Net Debt) बढ़कर ₹15,443 करोड़ हो गया है, जो पिछले क्वार्टर के ₹14,156 करोड़ से ज्यादा है। इसके चलते कंपनी का नेट डेट टू EBITDA रेशियो 1.72x पर पहुंच गया है, जबकि कंपनी का लक्ष्य इसे 1.5x के नीचे रखने का था। यह फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी (Financial Flexibility) और भविष्य में कर्ज चुकाने की क्षमता पर सवाल खड़े करता है।

आगे की राह और चुनौतियाँ

JSW Steel ने ₹7,500-₹10,000 करोड़ के महत्वाकांक्षी केपेक्स (Capex) प्लान का जिक्र किया है, जिसके साथ 18-20% ROCE (Return on Capital Employed) का लक्ष्य है। साथ ही, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स (Value-added products) पर फोकस बढ़ाने की बात कही है। लेकिन, इन सबके बीच कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती गिरते मार्जिन को संभालना और बढ़ते कर्ज का प्रबंधन करना है। भारतीय स्टील सेक्टर के लिए आउटलुक (Outlook) मजबूत बना हुआ है, पर चीन जैसे देशों से निर्यात के दबाव और इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों की नज़र कंपनी के एग्जीक्यूशन (Execution) पर रहेगी।

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