नतीजों में दिखा दमदार प्रदर्शन
Jindal Stainless ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए मजबूत वित्तीय परिणाम जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट रेवेन्यू 9.3% बढ़कर ₹42,955 करोड़ रहा, जबकि EBITDA में 19.2% की उछाल के साथ यह ₹5,560 करोड़ पर पहुंच गया। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 27.4% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹3,185 करोड़ रहा।
चौथी तिमाही (Q4 FY26) की बात करें तो, नेट रेवेन्यू साल-दर-साल 11.2% बढ़कर ₹11,337 करोड़ रहा। तिमाही EBITDA 37.1% बढ़कर ₹1,455 करोड़ दर्ज किया गया, और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 41.4% की बड़ी बढ़त के साथ यह ₹834 करोड़ पर जा पहुंचा। कंपनी के बोर्ड ने ₹3 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है, जिससे FY26 के लिए कुल डिविडेंड ₹4 प्रति शेयर हो गया है।
क्षमता विस्तार पर बड़ा दांव
Jindal Stainless अपनी उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ा रहा है। कंपनी ने इंडोनेशिया में 1.2 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता वाला एक नया स्टेनलेस स्टील मेल्ट शॉप चालू किया है, जिससे कंपनी की कुल मेल्टिंग क्षमता अब 4.2 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। इसके अलावा, भारत के भीतर कोल्ड-रोल्ड क्षमता विस्तार के लिए ₹900 करोड़ का अतिरिक्त निवेश करने की योजना है।
बाज़ार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
नतीजों के ऐलान के बाद, Jindal Stainless के शेयर में 3.13% की तेजी आई और यह ₹1,261.40 पर बंद हुआ। कंपनी ने अपना नेट डेट कम किया है और नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो को घटाकर 0.15x कर लिया है।
बाजार में Jindal Stainless का मुकाबला Tata Steel और JSW Steel जैसी बड़ी कंपनियों से है। हालांकि, इन कंपनियों की ग्रोथ भी अच्छी रही है, लेकिन वे अक्सर कम वैल्यूएशन पर ट्रेड करती हैं। Jindal Stainless का मौजूदा P/E रेशियो करीब 25x है और मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹40,000 करोड़ है।
विश्लेषकों का नजरिया आम तौर पर सकारात्मक है और वे आगे और उछाल की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें निकल (nickel) और क्रोमियम (chromium) जैसे प्रमुख रॉ मैटेरियल की कीमतों में अस्थिरता और ग्लोबल स्टील मार्केट की मौजूदा स्थिति को लेकर सतर्क रहने की सलाह है।
कंपनी की आक्रामक विस्तार योजनाओं के सामने कुछ संभावित चुनौतियां भी हैं। नई क्षमता, खासकर इंडोनेशिया वाली फैसिलिटी, वैश्विक बाजार में अधिक सप्लाई का कारण बन सकती है, जहां मांग में बदलाव और व्यापार नीतियों का असर पड़ सकता है। प्रॉफिटेबिलिटी अभी भी निकल और क्रोमियम जैसी इनपुट कॉस्ट की अस्थिरता पर निर्भर है।
