JTL Industries की सब्सिडियरी, JTL Engineering, ₹15 करोड़ का निवेश करने जा रही है। कंपनी अपनी HR कॉइल प्रोडक्शन क्षमता को दोगुना करके **10,000 मीट्रिक टन प्रति माह** करने की योजना बना रही है, जिसे Q4 FY27 तक पूरा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मकसद कॉइल की चौड़ाई की क्षमता को बढ़ाना और बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मज़बूत करना है।
JTL Engineering का बड़ा प्लान
JTL Industries की सब्सिडियरी, JTL Engineering, ने ₹15 करोड़ के कैपिटल स्पेंडिंग प्लान का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट के ज़रिए कंपनी अपनी हॉट-रोल्ड (HR) कॉइल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दोगुना करेगी। HR कॉइल, स्टील ट्यूब और पाइप बनाने के लिए एक अहम हिस्सा है।
प्रोडक्शन क्षमता में बड़ा उछाल
इस विस्तार के बाद, कंपनी का मंथली प्रोडक्शन 5,000 मीट्रिक टन से बढ़कर 10,000 मीट्रिक टन हो जाएगा। इसके साथ ही, कंपनी की मैक्सिमम कॉइल विड्थ (चौड़ाई) की क्षमता 9 इंच से बढ़कर 11 इंच कर दी जाएगी। इससे कंपनी अपने ग्राहकों की ज़रूरतें और प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन्स को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएगी।
बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर ज़ोर
JTL Industries के लिए यह कदम बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा है। स्पंज आयरन और स्टील स्क्रैप का इस्तेमाल करके अपने HR कॉइल्स का प्रोडक्शन करके, कंपनी रॉ मैटेरियल सप्लाई चेन को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेगी। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, JTL Industries ने ₹721.61 करोड़ का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू और ₹32.55 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। ₹15 करोड़ का यह निवेश कंपनी की पिछली तिमाही की कमाई की तुलना में काफी कम है, जिससे यह प्रोजेक्ट कंपनी के बैलेंस शीट पर ज़्यादा दबाव नहीं डालेगा।
जोखिमों पर भी नज़र
हालांकि, यह विस्तार एक ग्रोथ सिग्नल माना जा रहा है, लेकिन स्टील सेक्टर में कुछ जोखिम भी हैं। स्पंज आयरन और स्टील स्क्रैप जैसे रॉ मैटेरियल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। अगर इनपुट कॉस्ट बढ़ती है, तो कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है, खासकर अगर वह बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर नहीं डाल पाती है। इसके अलावा, कंपनी का परफॉरमेंस स्ट्रक्चरल स्टील ट्यूब और पाइप की डिमांड से जुड़ा हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग या कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी में किसी भी तरह की मंदी इन प्रोडक्ट्स की डिमांड को नेगेटिव रूप से प्रभावित कर सकती है।
निवेशक इस प्रोजेक्ट की प्रगति पर नज़र रख सकते हैं, क्योंकि यह फाइनेंशियल ईयर 2027 की चौथी तिमाही तक शुरू होने वाला है। आने वाली कंपनी की रिपोर्ट्स और तिमाही नतीजों से यह पता चलेगा कि यह बढ़ी हुई क्षमता एफिशिएंसी में सुधार लाती है या नहीं और आने वाले सालों में कंपनी की ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी पर इसका क्या असर पड़ता है।
