JSW Steel ने सितंबर तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं, जहां कंपनी का नेट प्रॉफिट तीन गुना तक बढ़ गया है। मजबूत सेल्स वॉल्यूम और बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट के दम पर कंपनी ने कच्चे माल की बढ़ती लागत के बावजूद मार्जिन को सुरक्षित रखा है।
मुनाफे की रफ्तार और ऑपरेशनल ताकत
JSW Steel के सितंबर तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने पिछले साल की तुलना में अपने नेट प्रॉफिट को 3 गुना तक बढ़ाया है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे बड़ी भूमिका सेल्स वॉल्यूम में बढ़ोतरी और ऑपरेशनल सुधारों की रही है। कंपनी ने साल की शुरुआत में जमा किए गए 2.10 लाख टन इन्वेंट्री का बेहतर इस्तेमाल कर वर्किंग कैपिटल को सुव्यवस्थित किया।
ऑपरेशनल मोर्चे पर, विजयनगर प्लांट में ब्लास्ट फर्नेस का उपयोग 90% के स्तर तक पहुंच गया, जिससे कंपनी को लागत दबाव के बावजूद मार्जिन बनाए रखने में मदद मिली। हालांकि, जिंक, आयरन ओर और कोकिंग कोल जैसी चीजों की कीमतों में उछाल के कारण ऑपरेटिंग खर्च में प्रति टन ₹1,300 की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कॉस्ट मैनेजमेंट और फ्यूचर स्ट्रैटेजी
बढ़ती लागत को थामने के लिए JSW Steel ने अक्टूबर में कीमतों में संशोधन किया है। मैनेजमेंट का मानना है कि तीसरी तिमाही में कोकिंग कोल की वजह से होने वाले $25 प्रति टन तक के खर्च के दबाव को कम करने में यह कदम मददगार साबित होगा। कंपनी अब वॉल्यूम बढ़ाने और फिक्स्ड कॉस्ट घटाने की रणनीति पर काम कर रही है।
डेट रिडक्शन और विस्तार
कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने पर बड़ा दांव खेला है। पहली छमाही में कंपनी ने ₹11,100 करोड़ से अधिक का निवेश विस्तार परियोजनाओं में किया, जिसे पूरी तरह से इंटरनल कैश फ्लो से फंड किया गया। साथ ही, कंपनी ने ₹29,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज चुकाया, जिसमें $500 मिलियन का बॉन्ड भी शामिल है। वर्तमान में कंपनी का नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो 1.28 है, जो इंडस्ट्री में काफी स्थिर माना जा रहा है।
भविष्य की बात करें तो, कंपनी का 87-90% कारोबार भारतीय बाजार पर केंद्रित रहने वाला है। हालांकि यूरोप के CBAM नियमों के कारण एक्सपोर्ट मार्केट में कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन कंपनी 2.5 GW की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता और कार्बन उत्सर्जन कम करने की तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है।
