JSW Steel Board: ₹14,000 करोड़ जुटाने की मंजूरी, शेयरधारकों की मंजूरी का इंतजार

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AuthorNeha Patil|Published at:
JSW Steel Board: ₹14,000 करोड़ जुटाने की मंजूरी, शेयरधारकों की मंजूरी का इंतजार
Overview

JSW Steel के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर आई है। कंपनी के बोर्ड ने **₹14,000 करोड़** तक की मोटी रकम जुटाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह फंड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) के जरिए जुटाया जाएगा।

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नई पूंजी जुटाने की पूरी रणनीति

JSW Steel ने 14 मई, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में ₹14,000 करोड़ के फंड जुटाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई है। इस बड़ी पूंजी जुटाने की योजना के तहत, कंपनी ₹7,000 करोड़ तक नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करेगी, जिनके साथ वारंट्स भी होंगे। ये डिबेंचर्स डेट इंस्ट्रूमेंट्स हैं जिन्हें इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है।

इसके साथ ही, JSW Steel ₹7,000 करोड़ और जुटाने के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) का सहारा लेगी। इस प्रक्रिया में कंपनी संस्थागत निवेशकों को इक्विटी शेयर या कनवर्टिबल सिक्योरिटीज बेचेगी।

कंपनी का कहना है कि इस फंड का इस्तेमाल मौजूदा कैपिटल खर्चों को पूरा करने, पुराने कर्ज को कम करने और रोजमर्रा के कामकाज के लिए नकदी (कैश फ्लो) को बेहतर बनाने में किया जाएगा। 14 मई, 2026 को शेयर बाजार बंद होने पर JSW Steel का शेयर 1.74% बढ़कर ₹1,297.05 पर बंद हुआ था।

यह नया अप्रूवल पिछले साल 25 जुलाई, 2025 के एक ऐसे ही QIP प्रस्ताव के बाद आया है, जिसकी एक साल की वैलिडिटी खत्म हो गई थी और उसका इस्तेमाल नहीं हो पाया था। इसलिए, अब कंपनी को इस नई योजना के लिए आगामी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरधारकों से मंजूरी लेनी होगी।

वैल्यूएशन पर चिंता और सेक्टर की स्थिति

JSW Steel का स्टॉक फिलहाल काफी ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। मई 2026 की शुरुआत में इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 40-42x के आसपास था, जो इसके 10 साल के एवरेज 19.36x और इंडस्ट्री के एवरेज 16.82x से काफी ज्यादा है। इसके मुकाबले Tata Steel का P/E रेश्यो करीब 29-30x, Vedanta का 6.3x और SAIL का 27.75x है। JSW Steel की मार्केट वैल्यू करीब ₹3.11-3.18 ट्रिलियन है।

भारतीय स्टील सेक्टर में मजबूती बनी हुई है। अप्रैल 2026 में कच्चे स्टील का प्रोडक्शन 5.8% और तैयार स्टील की खपत 8.1% बढ़ी है। इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स से मजबूत डोमेस्टिक डिमांड इस ग्रोथ को सहारा दे रही है। हालांकि, कोकिंग कोल जैसे अहम कच्चे माल की बढ़ती लागत और चीन से कमजोर मांग व ज्यादा एक्सपोर्ट से ग्लोबल स्टील की कीमतों पर दबाव एक चुनौती है।

JSW Steel ने पहले भी FY24 में ₹10,000 करोड़ और FY23 में ₹4,000 करोड़ NCDs और QIP के जरिए जुटाए हैं। कंपनी की विस्तार योजनाओं को देखते हुए फंड जुटाना जारी रहने की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए जोखिम और आगे की राह

बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक होने के बावजूद, कुछ जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। JSW Steel पर कर्ज का बोझ काफी ज्यादा है। मार्च 2025 तक डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.21 और जून 2025 तक 1.24 था, जबकि मार्च 2025 तक नेट डेट लगभग ₹76,563 करोड़ था। 40x से ऊपर का P/E रेश्यो बताता है कि भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें पहले से ही स्टॉक की कीमतों में शामिल हैं, जिससे स्टॉक में गिरावट का खतरा बढ़ जाता है।

पिछली QIP मंजूरी का इस्तेमाल न हो पाना यह भी संकेत देता है कि कंपनी के लिए फंड जुटाने में कुछ बाधाएं या बाजार की बदलती स्थितियां आ सकती हैं। नए शेयरधारकों की मंजूरी मिलने में भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, QIP के जरिए नए शेयर बेचने से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम होगी, जिसका असर प्रति शेयर आय (EPS) पर पड़ेगा।

कर्ज कम करने की उम्मीद

JSW Steel अपनी सब्सिडियरी Bhushan Power & Steel (BPSL) में JFE Steel को 50% तक हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। इस डील की वैल्यू ₹15,000–₹16,000 करोड़ आंकी जा रही है। अगर यह डील पूरी होती है, तो कंपनी का कर्ज काफी कम हो जाएगा, जिससे उसकी वित्तीय सेहत सुधर सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.