JSW Infrastructure के लिए दूसरी तिमाही मिली-जुली रही है। हालांकि कंपनी का रेवेन्यू **17%** बढ़कर **₹1,481 करोड़** पर पहुंच गया है, लेकिन हायर डिप्रिसिएशन और फॉरेक्स घाटे के चलते मुनाफा **11%** गिरकर **₹328 करोड़** रह गया है।
मुनाफे पर क्यों लगा ब्रेक?
कंपनी के मुनाफे में आई यह गिरावट ऑपरेशनल कमजोरी नहीं, बल्कि नॉन-ऑपरेटिंग कारणों का नतीजा है। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, डिप्रिसिएशन चार्ज बढ़ने और फॉरेक्स में हुए नुकसान ने बॉटम-लाइन पर दबाव बनाया है। दरअसल, कंपनी नए पोर्ट्स और एसेट्स पर भारी निवेश कर रही है, जिसका असर शॉर्ट टर्म में प्रॉफिटेबिलिटी पर दिख रहा है।
लॉजिस्टिक्स में तूफानी तेजी
कंपनी के लिए एक अच्छी खबर उसके लॉजिस्टिक्स बिजनेस से आई है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 71% उछलकर ₹279 करोड़ हो गया है, जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट 3 गुना बढ़कर ₹81 करोड़ रहा। कंपनी ने अपने रेल रेक फ्लीट को 42 से बढ़ाकर 78 यूनिट कर दिया है और मार्च 2027 तक इसे 110 यूनिट करने का टारगेट रखा है।
पोर्ट बिजनेस और भविष्य की राह
कोर पोर्ट ऑपरेशंस का रेवेन्यू 9% की ग्रोथ के साथ ₹1,202 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी ने कुल 29.4 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जिसमें पारादीप, एन्नोर और मैंगलोर टर्मिनल्स का बड़ा योगदान रहा। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता को 186 MTPA से बढ़ाकर 400 MTPA करने का है।
फिलहाल कंपनी के पास ₹1,693 करोड़ की नेट कैश पोजीशन है, जो इसे नई परियोजनाओं जैसे कि 'कोलकाता आउटर कंटेनर टर्मिनल' और 'NCR रेल इंफ्रास्ट्रक्चर' के अधिग्रहण के लिए मजबूत आधार देती है। अब निवेशकों की नजर इस पर होगी कि कंपनी अपनी कैपेक्स साइकिल को कैसे मैनेज करती है।
