मुनाफे में कैसे लौटी कंपनी?
JSW Cement के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी के ऑपरेशनल EBITDA में साल दर साल 31.5% का जोरदार उछाल देखा गया, जो ₹285.1 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही, सेल्स वॉल्यूम में भी 14% की वृद्धि के साथ 3.56 मिलियन टन (MT) का आंकड़ा पार किया। इसके चलते कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन साल भर पहले के 15.1% से बढ़कर 17.6% हो गया।
वॉल्यूम ग्रोथ के बीच मार्जिन पर दबाव
हालांकि, क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर (QoQ) आधार पर सीमेंट की कीमतों में 3.9% की गिरावट देखी गई, जिससे कंपनी के रेवेन्यू रियलाइजेशन पर दबाव पड़ा। साथ ही, फ्यूल की बढ़त और इंटर-प्लांट रॉ मैटेरियल ट्रांसफर जैसी इनपुट लागतों में हल्की बढ़ोतरी ने भी मार्जिन पर असर डाला। नए लेबर कोड लागू होने के कारण ₹33.66 करोड़ का एक्सेप्शनल लॉस भी नेट प्रॉफिट को प्रभावित कर गया। इन सबके बावजूद, एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले कंपनी का प्रॉफिट ₹217.95 करोड़ रहा। यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब भारतीय सीमेंट सेक्टर में FY26 में 6-7% की ग्रोथ का अनुमान है। तुलनात्मक रूप से, अल्ट्राटेक सीमेंट ने Q3 FY26 में 23% रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की, वहीं अंबुजा सीमेंट का PAT खर्चों के कारण 90.5% गिर गया।
विस्तार की आक्रामक योजनाएं
JSW Cement अपनी क्षमता का जोरदार विस्तार करने की तैयारी में है। कंपनी UAE के फुजैराह में 1.65 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की क्षमता वाली एक सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट लगा रही है, जिसमें करीब 39 मिलियन USD का निवेश अपेक्षित है। भारत में, राजस्थान के नागौर में इंटीग्रेटेड यूनिट Q4 FY26 में चालू होने की उम्मीद है। कंपनी की लॉन्ग टर्म योजना 41.85 MTPA ग्राइंडिंग और 13.04 MTPA क्लिनिकल कैपेसिटी तक पहुंचने की है। इस विस्तार के लिए कंपनी ने इस तिमाही में ₹491 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) किया।
क्रेडिट रेटिंग और डेट
JSW Cement के इन विस्तार plans को CRISIL से मिले AA-/Stable के अपग्रेडेड क्रेडिट रेटिंग का सहारा है, जो कंपनी की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है। 31 दिसंबर, 2025 तक कंपनी पर कुल नेट डेट ₹3,557 करोड़ था, जिसे कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं को देखते हुए मैनेजेबल मान रही है।
सेक्टर का भविष्य
पूरे भारतीय कंस्ट्रक्शन सेक्टर में FY26 में 8-10% की ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख चालक होंगे। हालांकि, फ्यूल जैसे पेटकोक की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतार-चढ़ाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। विश्लेषकों का मानना है कि FY25 से FY28 के बीच भारतीय सीमेंट सेक्टर की क्षमता 150-160 MT बढ़ने का अनुमान है, ऐसे में ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्राइसिंग स्ट्रैटेजीज कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
