Dixon Technologies Share Price: 40% गिरावट के बाद भी JPMorgan का भरोसा, ₹13,700 पार जाने का अनुमान!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Dixon Technologies Share Price: 40% गिरावट के बाद भी JPMorgan का भरोसा, ₹13,700 पार जाने का अनुमान!
Overview

Dixon Technologies Ltd. के शेयर में पिछले छह महीनों में **40%** से ज्यादा की बड़ी गिरावट आई है। ऐसे में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म JPMorgan ने इस स्टॉक पर अपना भरोसा कायम रखा है और **₹13,700** का टारगेट प्राइस भी बरकरार रखा है।

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EMS सेक्टर की सुस्ती और JPMorgan का दांव

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर में चल रही सुस्ती और ग्लोबल टेंशन के बीच Dixon Technologies Ltd. के शेयर पिछले छह महीनों में 40% से ज्यादा लुढ़क गए हैं। लेकिन, ग्लोबल फाइनेंशियल दिग्गज JPMorgan इस स्टॉक को लेकर काफी बुलिश (Bullish) बना हुआ है। फर्म ने न सिर्फ 'ओवरवेट' (Overweight) रेटिंग बरकरार रखी है, बल्कि शेयर का टारगेट प्राइस भी ₹13,700 पर ही रखा है। JPMorgan का मानना है कि मार्केट शायद PLI स्कीम के असर को कम आंक रहा है।

PLI स्कीम का खेल: क्यों है JPMorgan का भरोसा?

JPMorgan की यह पॉजिटिव राय (Positive Opinion) ऐसे समय आई है जब मार्केट में Dixon के शेयर की चाल सुस्त है। शेयर फिलहाल करीब ₹10,528 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि PLI स्कीम के भविष्य को लेकर जो अनिश्चितता दिख रही है, उसका शायद असर उतना नहीं होगा जितना मार्केट सोच रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) से कंपनी के मार्जिन में 50 बेसिस पॉइंट (0.50%) की कमी आ सकती है। लेकिन, अगर इस स्कीम का विस्तार होता है या कोई नया मॉडिफाइड स्कीम आती है, तो इससे कंपनी को वैसा ही मार्जिन बेनिफिट मिल सकता है। इससे FY27-28 के लिए कंपनी के EPS (Earnings Per Share) में 12% से 16% तक का तगड़ा उछाल आ सकता है। यह एक बड़ा अपसाइड (Upside) सिनेरियो दिखाता है।

वैल्यूएशन और सेक्टर का हाल

Dixon Technologies का P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो फिलहाल करीब 38.7x है। इसकी तुलना में, Kaynes Technology (P/E ~66x) और Amber Enterprises (P/E ~128x) जैसे पीयर्स (Peers) काफी महंगे हैं। भारतीय ESDM मार्केट के CY30 तक 141 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे सेक्टर में ग्रोथ की अच्छी उम्मीद है। सरकार भी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹40,000 करोड़ का भारी-भरकम आउटले (Outlay) करने की योजना बना रही है, जो पॉलिसी सपोर्ट को दिखाता है। हालांकि, एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है, कुछ इसे 'सेल' (Sell) की रेटिंग दे रहे हैं तो कुछ 'बाय' (Buy) की।

जोखिम क्या हैं?

JPMorgan की बुलिश कॉल के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम भी हैं। सबसे बड़ा कंसर्न (Concern) मार्जिन में कमी का है, जो FY27 से 50 बेसिस पॉइंट घट सकता है अगर PLI इंसेंटिव्स नहीं मिले। इसके अलावा, कंपनी का क्लाइंट कंसंट्रेशन (Client Concentration) भी एक चिंता का विषय है। खासकर Motorola पर उसकी निर्भरता, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 25% है, जोखिम बढ़ाती है। Q3FY26 में इस की-क्लाइंट से वॉल्यूम में 20% की गिरावट देखी गई है। EMS सेक्टर में व्यापक सुस्ती भी बनी रह सकती है।

भविष्य की राह

कुल मिलाकर, एनालिस्ट्स का औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹13,162.10 है, जो मौजूदा लेवल से 25% से ज्यादा की तेजी का संकेत देता है। यह आउटलुक (Outlook) काफी हद तक PLI स्कीम जैसे सरकारी इंसेंटिव्स के विकास पर निर्भर करता है। सेक्टर की ग्रोथ अच्छी है, लेकिन Dixon की मार्जिन प्रेशर को झेलने और क्लाइंट बेस को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने की क्षमता उसके भविष्य के प्रदर्शन के लिए अहम होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.