JITF Infralogistics Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंसोलिडेटेड (Consolidated) और स्टैंडअलोन (Standalone) प्रदर्शन के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिला है।
जहां तक स्टैंडअलोन नतीजों का सवाल है, कंपनी ने Q3 FY25 में ₹96.99 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 21.75% की अच्छी बढ़ोतरी है। Profit Before Tax (PBT) ₹1.26 करोड़ से बढ़कर ₹7.94 करोड़ पर पहुंच गया। Profit After Tax (PAT) में भी जोरदार उछाल आया, जो पिछले साल के ₹0.39 करोड़ से लगभग दस गुना बढ़कर ₹3.90 करोड़ रहा। हालांकि, नौ महीनों (Nine Months) के लिए स्टैंडअलोन रेवेन्यू 6.4% घटकर ₹259.17 करोड़ हो गया, और PAT में 10.5% की गिरावट आई, जो ₹16.31 करोड़ रहा।
इसके बिल्कुल विपरीत, कंसोलिडेटेड लेवल पर कंपनी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा। Q3 FY25 में रेवेन्यू 52.9% की भारी छलांग लगाकर ₹822 करोड़ तक पहुंच गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले साल की समान अवधि में ₹25 करोड़ के लॉस के मुकाबले, इस बार कंपनी ने ₹18.60 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया। नौ महीनों के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 29.3% की बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹1909.70 करोड़ पर पहुंचा। वहीं, लॉस ₹25 करोड़ से घटकर ₹2.10 करोड़ पर आ गया।
कंसोलिडेटेड नतीजों को नौ महीनों के दौरान JRIL (Tindal Rail Infrastructure Limited) के डिसइन्वेस्टमेंट (disinvestment) से हुए ₹134.15 करोड़ के एक्सेप्शनल गेन (Exceptional Gain) का भी सहारा मिला। इसके अतिरिक्त, ₹10.29 करोड़ का एक एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Item) शेयर-बेस्ड पेमेंट्स (Share-based Payments) से संबंधित था।
लेकिन, इन सब के बीच कंपनी ने कुछ बड़ी चिंताओं का भी खुलासा किया है। कंपनी ने दो सब्सिडियरीज (subsidiaries) - JITF Water Infra (Naya Raipur) Limited और JITF Urban Waste Management (Bathinda) Limited - के 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) स्टेटस को लेकर 'मटेरियल अनसर्टेनिटीज' (Material Uncertainties) का जिक्र किया है। पहली सब्सिडियरी के लिए कन्सैशन एग्रीमेंट (Concession Agreement) आगे नहीं बढ़ा है, जबकि दूसरी के मामले में आर्बिट्रेशन अवार्ड (Arbitration Award) को लेकर विवाद चल रहा है। ये अनिश्चितताएं भविष्य के प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
कंपनी ने फिलहाल कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking Guidance) जारी नहीं की है। ऐसे में, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इन अनसर्टेनिटीज के समाधान और कंपनी के आगे के प्रदर्शन पर बारीकी से नज़र रखें।