ईरान युद्ध का भारतीय बीयर पर डबल अटैक: पै raisins महंगे, दाम **15%** तक बढ़ेंगे, शॉर्टेज का भी खतरा!

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AuthorAditya Rao|Published at:
ईरान युद्ध का भारतीय बीयर पर डबल अटैक: पै raisins महंगे, दाम **15%** तक बढ़ेंगे, शॉर्टेज का भी खतरा!
Overview

ईरान में चल रहे सैन्य संघर्ष का असर अब भारत की बीयर इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित हो गई है और पै Raisins की लागत आसमान छू रही है, जिसके चलते बीयर बनाने वाली कंपनियों ने कीमतों में **12-15%** तक की बढ़ोतरी की चेतावनी दी है। साथ ही, दुकानों में बीयर की कमी भी हो सकती है।

पै Raisins की लागत बढ़ी, प्रोडक्शन पर असर

इस मुश्किल की जड़ें गहरी हैं। ईरान संघर्ष की वजह से ग्लोबल ब्रूअर्स के लिए जरूरी पै Raisins की सप्लाई और कीमत दोनों प्रभावित हुई है। ग्लास बॉटल बनाने के लिए जरूरी गैस की किल्लत ने उत्पादन लागत को करीब 20% तक बढ़ा दिया है।

वहीं, पेपर कार्टन के दाम दोगुने हो गए हैं, और लेबल व टेप जैसे अन्य खर्चों में भी इजाफा हुआ है। इस बढ़ती लागत का सीधा असर Heineken, Anheuser-Busch InBev, और Carlsberg जैसी बड़ी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ रहा है।

गैस की किल्लत से प्रोडक्शन में कटौती

ग्लास मैन्युफैक्चरर्स, जो भट्टियों को लगातार चलाने के लिए गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, गैस की कमी से जूझ रहे हैं। इसके चलते कई ग्लास बॉटल निर्माताओं को प्रोडक्शन कम करना पड़ा है या प्रोडक्शन पूरी तरह रोकना पड़ा है।

एल्युमीनियम कैन के सप्लायर्स भी उत्पादन में कटौती की चेतावनी दे रहे हैं। यह संकट ऐसे समय में आया है जब भारत में गर्मी का पीक सीजन शुरू होने वाला है, जो बीयर की डिमांड के लिए सबसे अहम होता है।

15% तक दाम बढ़ाने की मांग, रेगुलेशन बनी रोड़ा

Brewers Association of India ने बढ़ती उत्पादन लागत को वसूलने के लिए कीमतों में 12-15% की बढ़ोतरी की मांग की है। एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी ने कहा है कि कई ऑपरेशंस अब आर्थिक रूप से वायबल नहीं रह गए हैं।

भारत में शराब उद्योग कड़े रेगुलेशन के तहत आता है, और कीमतों में बदलाव के लिए करीब 28 राज्यों में से दो-तिहाई राज्यों की सरकारों से मंजूरी लेनी पड़ती है। यह रेगुलेटरी बाधाएं बीयर कंपनियों के लिए उन राज्यों में लगातार सप्लाई सुनिश्चित करना मुश्किल बना सकती हैं जहाँ कीमत में बढ़ोतरी की मंजूरी नहीं मिल पाती।

बीयर के अलावा अन्य सेक्टर भी प्रभावित

यह पै Raisins की लागत का संकट सिर्फ बीयर तक ही सीमित नहीं है। एक प्रमुख ग्लास बॉटल निर्माता Fine Art Glass Works के CEO नितिन अग्रवाल के अनुसार, गैस की किल्लत और 17-18% तक बढ़ी कीमतों के चलते उन्होंने अपना प्रोडक्शन 40% घटा दिया है।

पहले से ही $5 बिलियन के बॉटल्ड वॉटर मार्केट ने प्लास्टिक बॉटल और कैप्स की बढ़ती लागत के चलते कीमतों में 11% तक का इजाफा कर दिया है। यह दिखाता है कि कैसे इंडस्ट्री-व्यापी चुनौतियाँ उन सभी सेक्टर्स को प्रभावित कर रही हैं जो ग्लास और प्लास्टिक पै Raisins पर निर्भर हैं।

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