Interarch Building Solutions के शेयरों में आज **4%** की गिरावट दर्ज की गई, जो **₹1,700.50** पर कारोबार कर रहे हैं। यह गिरावट पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों के बाद आई है, जिसमें कंपनी का मुनाफा **₹28.2 करोड़** पर लगभग स्थिर रहा, जबकि रेवेन्यू में **20.7%** की बढ़ोतरी हुई थी। निवेशकों की नजर मार्जिन पर बढ़ते दबाव और नए ग्रोथ ट्रिगर पर है, जिसमें 1:5 स्टॉक स्प्लिट और **₹250 करोड़** की फंडरेज़िंग शामिल है।
क्यों आई शेयरों में गिरावट?
Interarch Building Solutions के शेयर सोमवार को 4.08% टूटकर ₹1,700.50 पर आ गए। इसकी वजह कंपनी के पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे रहे। हालांकि, कंपनी के ऑपरेशन्स से रेवेन्यू में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 20.7% की जोरदार बढ़ोतरी होकर ₹459.6 करोड़ दर्ज किया गया, लेकिन टैक्स के बाद नेट प्रॉफिट लगभग ₹28.2 करोड़ पर ही ठहरा रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹28.4 करोड़ था।
मुनाफे पर कैपेसिटी एक्सपेंशन का असर
रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे में स्थिरता की मुख्य वजह बढ़ी हुई डेप्रिसिएशन (Depreciation) लागत और अन्य आय में कमी रही। कंपनी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है, जिसमें गुजरात के खेड़ा में नया प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग (PEB) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी शामिल है। इस विस्तार के चलते डेप्रिसिएशन का खर्च बढ़ गया है, जिससे बॉटम लाइन पर दबाव पड़ा है। नेट प्रॉफिट मार्जिन 131 बेसिस पॉइंट घटकर 6.1% पर आ गया। वहीं, EBITDA में 24.6% की मजबूत बढ़ोतरी होकर ₹39.4 करोड़ रहा, लेकिन बढ़ी हुई नॉन-कैश लागतों ने नेट प्रॉफिट के स्तर पर इस बढ़त को बेअसर कर दिया।
ग्रोथ प्लान्स और फंडरेज़िंग
तिमाही नतीजों के साथ, कंपनी ने कुछ बड़े कॉर्पोरेट एक्शन की भी घोषणा की है, जिसका असर शेयरधारकों की भावनाओं पर पड़ सकता है। बोर्ड ने शेयरों में लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाने के उद्देश्य से 1:5 के अनुपात में स्टॉक स्प्लिट को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, कंपनी ने फ्यूचर ग्रोथ के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹250 करोड़ जुटाने की भी मंजूरी प्राप्त की है। अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में, Interarch ने कनाडा स्थित ER Steel Inc. के साथ एक स्ट्रेटेजिक ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) भी किया है, जिसका लक्ष्य उत्तरी अमेरिकी बाजारों के लिए बिल्डिंग प्रोडक्ट्स का निर्माण और सप्लाई करना है।
31 जुलाई 2026 तक ₹1,864 करोड़ का मजबूत ऑर्डर बुक कंपनी के पास है, जो आने वाली तिमाहियों के लिए अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी दिखाता है। हालांकि, यह स्टॉक इस साल अब तक 26% से ज्यादा गिर चुका है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि नया खेड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट कितनी जल्दी पूरी क्षमता से काम करना शुरू करता है और डेप्रिसिएशन से जुड़ी लागत का दबाव आने वाली तिमाहियों में स्थिर होता है या नहीं। QIP का सफल एग्जीक्यूशन और नए ज्वाइंट वेंचर का इंटीग्रेशन शेयरधारकों के लिए मुख्य मॉनिटरेबल होंगे, क्योंकि कंपनी अल्पकालिक प्रॉफिट ठहराव से आगे बढ़ने का लक्ष्य रखती है।
