Innovision को NHAI से मध्य प्रदेश में टोल कलेक्शन के दो बड़े प्रोजेक्ट्स मिले हैं, जिनकी कुल वैल्यू **₹243.60 करोड़** है। हालांकि, ये कॉन्ट्रैक्ट्स केवल **1 साल** के हैं, जिससे कंपनी पर लगातार नए बिड्स जीतने का दबाव बना रहेगा।
कॉन्ट्रैक्ट्स की डीटेल्स
कंपनी ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के साथ दो बड़े करार किए हैं। इसमें ₹24.53 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट NH-39 के पचवारा टोल प्लाजा के लिए है, जबकि ₹219.07 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट इंदौर-देवास सेक्शन (NH-3) के IDTL A और B टोल प्लाजा के लिए मिला है।
इन कॉन्ट्रैक्ट्स का कार्यकाल 1 साल का है। अगर कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2026 के ₹36.35 करोड़ के नेट प्रॉफिट से तुलना करें, तो यह वैल्यू काफी बड़ी दिखती है। लेकिन समस्या यह है कि कंपनी के पास लंबे समय की रेवेन्यू विजिबिलिटी नहीं है, क्योंकि उसे भविष्य में आय बनाए रखने के लिए बार-बार टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेना होगा।
बिजनेस मॉडल का जोखिम
टोल कलेक्शन का बिजनेस काफी प्रतिस्पर्धा वाला है। ई-टेंडरिंग के जरिए होने वाली इस लड़ाई में मार्जिन अक्सर बहुत कम हो जाते हैं। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि क्या कंपनी केवल टॉप-लाइन (रेवेन्यू) बढ़ा रही है या ऑपरेशन्स, स्टाफ कॉस्ट और मेंटेनेंस खर्च घटाकर मुनाफे को भी बचा पा रही है। यहां 'रोलओवर रिस्क' सबसे बड़ा है, क्योंकि 12 महीने बाद इन साइट्स की रेवेन्यू खत्म हो जाएगी, जिसके लिए नई जीत अनिवार्य है।
शेयर का हाल
फिलहाल Innovision का स्टॉक ₹245 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो इसके 52-वीक लो के बेहद करीब है। पिछले कुछ समय में स्टॉक ने ₹470 का हाई लेवल भी देखा था, लेकिन फिलहाल निवेशकों का सेंटीमेंट काफी सुस्त है। बाजार इस बात को लेकर सतर्क है कि कंपनी इन ऑर्डर्स को क्वालिटी अर्निंग्स में बदल पाएगी या नहीं।
