Innovision के ₹323 करोड़ के आईपीओ (IPO) पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा झटका नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से मिला है, जो कंपनी का सबसे बड़ा क्लाइंट है और करीब 57.75% रेवेन्यू इसी से आता है। NHAI ने कंपनी पर 'पैरेलल सॉफ्टवेयर' इस्तेमाल करके टोल सिस्टम को धोखा देने का आरोप लगाया है। इस मामले में मई 2024 में 6 महीने का बैन लगा था, लेकिन दिसंबर 2025 में 'पैरेलल सॉफ्टवेयर फ्रॉड' के आरोप में कंपनी को 2 साल के लिए डीबार् (debar) कर दिया गया है। अगर कंपनी कानूनी लड़ाई हार जाती है, तो इसका आधा से ज़्यादा बिजनेस खत्म हो सकता है। कंपनी को अन्य क्लाइंट्स से भी बैन नोटिस और पेनल्टी का सामना करना पड़ा है।
हाई वैल्यूएशन और वित्तीय सेहत
कंपनी की वैल्यूएशन (Valuation) भी सवालों के घेरे में है। FY25 के नतीजों के आधार पर, लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹1,290.72 करोड़ होगा, जिससे इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) मल्टीपल 44.5x हो जाता है। यह भारतीय शेयर बाजार के औसत P/E 22.32x और कंसल्टिंग कंपनियों के औसत 26.21x से कहीं ज़्यादा है। कंपनी की प्रति शेयर कमाई (EPS) ₹6.22 है, जो Krystal Integrated Services (₹42.30) और Quess Corp (₹18.72) जैसे साथियों से काफी कम है। इसी तरह, नेट एसेट वैल्यू (NAV) ₹27.62 है, जो Krystal Integrated (₹269.30) और SIS Limited (₹167.50) से बहुत पीछे है। यह हाई प्राइसिंग एक बहुत उम्मीद वाली सोच दिखाती है, जो बिजनेस के जोखिमों को पूरी तरह कवर नहीं कर पाती।
वित्तीय तौर पर भी कंपनी दबाव में दिख रही है। FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो नेगेटिव (-₹21.88 करोड़) रहा और H1 FY26 में भी यह नेगेटिव (-₹16.34 करोड़) रहा। जनवरी 2026 तक कंपनी पर कुल कर्ज ₹140.63 करोड़ था। कंपनी का डेट सर्विस कवरेज रेश्यो (DSCR), यानी कर्ज चुकाने की क्षमता, H1 FY26 में सिर्फ 0.27 थी। ये आंकड़े बताते हैं कि IPO से मिलने वाले पैसे कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल बढ़ाने के लिए कितने ज़रूरी हैं, लेकिन यह कंपनी की पिछली उधारी की समस्याओं को भी उजागर करते हैं।
रेवेन्यू का कंसंट्रेशन और ऑपरेशनल चुनौतियां
Innovision की कमाई टोल प्लाजा मैनेजमेंट (FY25 में 56% रेवेन्यू) और मैनपावर सेवाओं (41%) पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जो मिलकर करीब 97.5% रेवेन्यू देते हैं। यह मॉडल कंपनी को बड़े जोखिमों में डालता है अगर इन सेगमेंट्स में मांग घटती है या जांच तेज होती है। कंपनी के पास 14,000 से ज़्यादा कर्मचारी हैं, जिससे ऑपरेशनल चुनौतियां भी हैं। जांच में EPF और ESIC डिपॉजिट में देरी के 1,170 मामले और सैलरी से जुड़े 78 लेबर केस सामने आए हैं। छह महीने में 8.50% का एट्रीशन रेट (Attrition Rate) भी कर्मचारियों के असंतोष और भर्ती लागत बढ़ने का संकेत देता है।
बाजार का मिजाज भी थोड़ा ठंडा है। ग्रे मार्केट (Grey Market) में शेयर ऊपरी बैंड ₹548 पर फ्लैट ट्रेड कर रहा है, जो IPO खुलने से पहले निवेशकों की हिचकिचाहट को दर्शाता है।
Innovision का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह NHAI और अन्य क्लाइंट्स के साथ अपने कानूनी मामलों को कैसे संभालती है। हाई वैल्यूएशन, नेगेटिव कैश फ्लो और कर्ज को देखते हुए, कंपनी के भविष्य के कॉन्ट्रैक्ट्स और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट की बारीकी से जांच करनी होगी। सफलता गंभीर जोखिमों को मैनेज करने के साथ-साथ ग्रोथ बनाए रखने पर टिकी होगी।