Indus Towers: 52-Week High पर पहुंचा शेयर, पर मुनाफे में **55%** की बड़ी सेंध! क्या हैं संकेत?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indus Towers: 52-Week High पर पहुंचा शेयर, पर मुनाफे में **55%** की बड़ी सेंध! क्या हैं संकेत?
Overview

Indus Towers के शेयर ने **₹474.65** का 52-हफ्ते का नया रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन, इसी के साथ कंपनी ने दिसंबर **2025** को समाप्त तिमाही में नेट प्रॉफिट में **55.6%** की भारी गिरावट दर्ज की है।

52-हफ्ते की ऊंचाई के पीछे छिपी तिमाही की गिरावट

Indus Towers के शेयर ने हाल ही में ₹474.65 का 52-हफ्ते का नया शिखर छुआ है। यह उछाल पहली नज़र में कंपनी के मजबूत सालाना नतीजों के अनुरूप लग सकता है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। दिसंबर 2025 की तिमाही में कंपनी के नेट प्रॉफिट (Net Profit) में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 55.6% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह सालाना सफलता और तिमाही निराशा के बीच का बड़ा अंतर निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, जिस पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत है।

नतीजों का विश्लेषण: सालाना मजबूत, तिमाही कमजोर

16 फरवरी, 2026 को शेयर ₹474.65 के स्तर पर पहुंच कर 52-हफ्ते का हाई बनाने में कामयाब रहा। इस तेजी को मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के दमदार नतीजों का सहारा मिला। इस अवधि में, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) बढ़कर ₹30,122.80 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट में 64.5% का शानदार उछाल आकर ₹9,931.70 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) लगभग ₹1.23 लाख करोड़ है, और इसका ट्रेलिंग P/E रेशियो (Trailing P/E Ratio) करीब 17.26x है।

इसके बावजूद, जब दिसंबर 2025 की तिमाही के नतीजे सामने आए, तो बाज़ार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। इस तिमाही में रेवेन्यू में मामूली 7.9% की बढ़ोतरी होकर ₹8,146.30 करोड़ दर्ज किया गया, लेकिन नेट प्रॉफिट में 55.6% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹1,775.90 करोड़ पर आ गया। यह गिरावट Q4 FY25 में आई 4% की गिरावट के समान है, जिसने 2 मई, 2025 को शेयर में 7% की गिरावट लाई थी। इससे यह साफ होता है कि सालाना आंकड़े मजबूत होने के बावजूद, तिमाही नतीजों की अस्थिरता, अल्पावधि में निवेशक भावना को प्रभावित कर सकती है।

बाज़ार की स्थिति और विकास की राह

Indus Towers भारतीय टेलीकॉम टावर सेक्टर में सक्रिय है, जो 5G के बढ़ते विस्तार और डेटा खपत में वृद्धि के कारण विकास की राह पर है। यह अनुमान है कि अगले दो फाइनेंशियल ईयर (FY25 और FY26) के दौरान इंडिपेंडेंट टावर कंपनियां ग्रामीण नेटवर्क के विस्तार और शहरी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगभग ₹21,000 करोड़ का निवेश करेंगी। कंपनी ने अपने वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करते हुए 2021 में 0.44 रहा डेब्ट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) को मार्च 2025 तक घटाकर सिर्फ 0.07 कर लिया है, जो एक मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। मार्च 2025 तक 2,49,000 से अधिक टावरों और 3,68,000 को-लोकेशंस (Co-locations) के अपने विशाल नेटवर्क के साथ, यह कंपनी बाज़ार की लीडर बनी हुई है। इसके मुख्य प्रतिस्पर्धियों में Summit Digital (जिसने ATC India की संपत्तियां खरीदीं), GTL Infra और Tower Vision शामिल हैं।

यह सेक्टर TRAI द्वारा डेटा स्पीड और वॉयस क्वालिटी के लिए बढ़ाए गए परफॉरमेंस मैंडेट्स (Performance Mandates) और टेलीकम्युनिकेशन (क्रिटिकल टेलीकम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर) रूल्स, 2024 जैसे नए नियामक ढांचे (Regulatory Frameworks) का भी सामना कर रहा है, जिसमें कड़े अनुपालन और सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

चिंता के प्रमुख बिंदु और पिछली समस्याएं

दिसंबर 2025 की तिमाही में नेट प्रॉफिट में आई ₹4,003.20 करोड़ से ₹1,775.90 करोड़ की भारी गिरावट मार्जिन दबाव (Margin Pressure) या परिचालन अक्षमताओं (Operational Inefficiencies) की ओर इशारा करती है, जो शायद सालाना रिपोर्टों में पूरी तरह से स्पष्ट न हों। अतीत में, Indus Towers ने Vodafone Idea से बड़ी बकाया राशि (Receivables) के कारण तीन साल तक डिविडेंड (Dividend) भुगतान रोक दिया था, और हाल ही में इन बकाया राशियों में कमी आने के बाद शेयरधारकों को भुगतान फिर से शुरू करने के संकेत मिले हैं।

इसके अलावा, कंपनी ने अगस्त 2023 तक ₹14,243.3 करोड़ की मुकदमेबाजी (Litigation) और ₹5,454 करोड़ की GST डिमांड का सामना किया, हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने दिसंबर 2024 में GST डिमांड को खारिज कर दिया था। फरवरी 2025 में बिहार GST अधिकारियों द्वारा टावरों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) को अस्वीकार करने के आरोप में ₹4.52 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे कंपनी ने चुनौती देने की बात कही है।

कंपनी का डेब्ट कम होने के बावजूद, Indus Infra Trust की फाइलिंग के अनुसार Q3 FY25 के लिए कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 14.8% की गिरावट देखी गई, जो समूह स्तर पर व्यापक दबाव का संकेत देती है। टेलीकॉम सेक्टर, हालांकि बढ़ रहा है, लेकिन कुछ टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं से बकाया राशि (Receivables) के मुद्दों के कारण ICRA ने इसके आउटलुक को 'Negative' कर दिया है।

भविष्य का नज़रिया

विश्लेषकों का दृष्टिकोण आम तौर पर सकारात्मक बना हुआ है, जिसमें 'आउटपरफॉर्म' (Outperform) की कंसेंसस रेटिंग और ₹461.17 के आसपास का औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट है, हालांकि कुछ अनुमान अगले साल मामूली गिरावट का संकेत देते हैं। हाल की तिमाही मुनाफे में गिरावट के बावजूद, कंपनी की प्रमुख बाज़ार स्थिति, कम कर्ज और सेक्टर के अंतर्निहित विकास चालक, विशेष रूप से 5G का विस्तार, रिकवरी की क्षमता का संकेत देते हैं। हालांकि, चल रहे नियामक विकास और राजस्व वृद्धि को लगातार लाभप्रदता में बदलने की कंपनी की क्षमता निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे जिन पर नज़र रखने की आवश्यकता है।

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