भारत का जल अवसंरचना बाजार FY29 तक **₹6.51 लाख करोड़** तक पहुंचने का अनुमान है। जल जीवन मिशन और शहरी मांग इसमें तेजी लाएगी। WPIL और Welspun Enterprises के ऑर्डर बुक मजबूत हैं, जबकि EMS जैसी कंपनियों को पेमेंट में देरी से राजस्व पर दबाव झेलना पड़ रहा है।
क्या है खास?
भारत का जल अवसंरचना (Water Infrastructure) सेक्टर ग्रोथ के एक बड़े दौर में प्रवेश करने वाला है। CRISIL Intelligence के आंकड़ों के मुताबिक, यह बाज़ार FY20-FY24 के ₹3.95 लाख करोड़ के औसत से बढ़कर FY25-FY29 के बीच ₹6.31–₹6.51 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है। इस ग्रोथ की मुख्य वजहें बढ़ती शहरी मांग, उद्योगों की ज़रूरतें और जल जीवन मिशन (JJM) जैसे सरकारी इनिशिएटिव हैं। कई लिस्टेड कंपनियां इस मौके का फायदा उठाने की तैयारी में हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन एग्जीक्यूशन, ऑर्डर मिलने और पेमेंट साइकिल पर निर्भर करेगा।
WPIL: इंटरनेशनल स्ट्रेंथ और एक्विजिशन
Pumps और Water Solutions देने वाली कंपनी WPIL ने घरेलू चुनौतियों के बावजूद अपनी पकड़ बनाए रखी है। कंपनी का रेवेन्यू FY26 में 3% बढ़कर ₹1,855 करोड़ रहा। इस स्थिरता का बड़ा कारण इसका अंतर्राष्ट्रीय बिज़नेस है, जो अब कुल रेवेन्यू का 61% से ज़्यादा है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट 9% बढ़कर ₹318.3 करोड़ हुआ, और मार्जिन सुधरकर 17.2% हो गया। कंपनी का ₹4,936 करोड़ का ऑर्डर बुक, दक्षिण अफ्रीका में हालिया विस्तार और जल जीवन मिशन के तहत सरकारी प्रोजेक्ट्स से मजबूत है।
Welspun Enterprises: बड़े ऑर्डर बुक की विजिबिलिटी
Welspun Enterprises ने जल क्षेत्र में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है, जो अब उसके कुल ₹19,739 करोड़ के ऑर्डर बुक का 70% हिस्सा है। कंपनी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स जैसे कॉम्प्लेक्स इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर फोकस करती है। FY26 में, रेवेन्यू में मामूली 2% की गिरावट (₹3,615 करोड़) के बावजूद, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16% बढ़कर ₹845 करोड़ रहा। मार्जिन भी बढ़कर 23% पर पहुँच गया। ₹13,800 करोड़ से ज़्यादा का वाटर-स्पेशिफिक ऑर्डर बुक कंपनी को लंबे समय तक रेवेन्यू की विजिबिलिटी देता है, बशर्ते कि वह इन प्रोजेक्ट्स को कुशलता से पूरा कर सके।
EMS: पेमेंट चुनौतियों से निपटना
शहरी जल आपूर्ति और सीवरेज में माहिर EMS Limited के लिए यह साल थोड़ा मुश्किल रहा। FY26 में इसका रेवेन्यू 24% घटकर ₹733 करोड़ रह गया। इस गिरावट का मुख्य कारण बाहरी वित्तीय दबाव और सरकारी SPARSH पोर्टल से जुड़े पेमेंट में देरी था। कम रेवेन्यू और प्रॉफिट के बावजूद, कंपनी के पास ₹1,837 करोड़ का ऑर्डर बुक है, जो करीब दो साल के काम के बराबर है। मैनेजमेंट का लक्ष्य FY27 तक रेवेन्यू रिकवरी और मार्जिन को 25% तक नॉर्मलाइज करना है, जिसके लिए पेमेंट मिलने की रफ़्तार महत्वपूर्ण साबित होगी।
सेक्टर की हकीकत और निवेशकों के लिए खास बातें
सरकारी खर्च बढ़ने से जल अवसंरचना सेक्टर का भविष्य भले ही उज्ज्वल दिख रहा हो, लेकिन यह काफी हद तक पब्लिक सेक्टर साइकिल पर निर्भर है। ऑर्डर मिलने से लेकर काम पूरा करने और पेमेंट मिलने तक का सफ़र सबसे बड़ी चुनौती है। जो कंपनियां अपने कैश फ्लो को मैनेज कर सकती हैं और सरकारी पोर्टल्स जैसे एडमिनिस्ट्रेटिव पेमेंट प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पार कर सकती हैं, वे ग्रोथ बनाए रखने की बेहतर स्थिति में होंगी। इस सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशकों को ऑर्डर एग्जीक्यूशन टाइमलाइन, वर्किंग कैपिटल पर पेमेंट देरी के असर और नए प्रोजेक्ट्स के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियों द्वारा अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।
