ग्रोथ का इंजन: पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर
इस बूम की सबसे बड़ी वजह सरकार की मजबूत नीतियां (Policies) और ज़बरदस्त इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हैं। PM Gati Shakti नेशनल मास्टर प्लान और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी जैसे कदम सप्लाई चेन को बेहतर बना रहे हैं। इनका मकसद लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को GDP के 13-14% से घटाकर 8% तक लाना है, जो ग्लोबल एवरेज के करीब है। इसके अलावा, 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है, जिससे वेयरहाउसिंग स्पेस की डिमांड बढ़ रही है। साथ ही, सेमीकंडक्टर और बायोफार्मा जैसे सेक्टर्स के लिए स्पेशल स्कीमें भी रियल एस्टेट डेवलपमेंट को गति दे रही हैं।
30 हब शहरों की पहचान
Colliers India ने 30 ऐसे शहरों की पहचान की है जहां इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं। इन्हें Prime, Emerging और Nascent हब में बांटा गया है, जो कनेक्टिविटी, इंफ्रा और मार्केट की मैच्योरिटी पर आधारित हैं। खास बात यह है कि Tier II और Tier III शहरों का योगदान बढ़ रहा है। 2024 में कुल 533.1 मिलियन वर्ग फुट वेयरहाउसिंग स्टॉक में से करीब 100 मिलियन वर्ग फुट (यानी 18.7%) इन छोटे शहरों से आ रहा है। यह GST लागू होने के बाद हब-एंड-स्पोक लॉजिस्टिक्स मॉडल की ओर एक बड़े बदलाव को दर्शाता है।
मार्केट की चाल और स्पेशल सेगमेंट्स
एशिया-पैसिफिक रीजन में इंडिया एक पसंदीदा वेयरहाउसिंग डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। बढ़ती मिडिल क्लास और डोमेस्टिक कंजम्पशन इसकी मांग को बढ़ा रहे हैं। बाजार 58.1 अरब डॉलर (USD 58.1 billion) का है और 2030 तक 104.7 अरब डॉलर (USD 104.7 billion) तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 10.3% CAGR की ग्रोथ दर्शाता है। आधुनिक, ग्रेड A फैसिलिटी की मांग तेज है, जिसके 2030 तक 13.22% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। खास सेगमेंट्स जैसे कोल्ड स्टोरेज (Cold Storage) की मांग भी 18% CAGR से बढ़ सकती है, खासकर फूड और फार्मा सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के लिए।
सामने आ रहे चैलेंज
हालांकि, इस बूम के साथ कुछ बड़े चैलेंज भी जुड़े हैं। ज़मीन की बढ़ती कीमतें (Rising Land Prices) लागत बढ़ा रही हैं। अलग-अलग राज्यों में बिखरी हुई रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Fragmentation) सप्लाई चेन में रुकावट पैदा कर रही है। ब्यूरोक्रेसी से जुड़ी देरी, लैंड ओनरशिप के पेचीदा मामले और ऑपरेशनल कॉस्ट का बढ़ना भी दिक्कतें पैदा कर रहा है। वहीं, ऑटोमेशन (Automation) के बढ़ने से स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत बढ़ रही है, लेकिन उनकी सप्लाई कम है। कुछ इलाकों में ज्यादा डिमांड का अनुमान लगाकर ज़रूरत से ज़्यादा वेयरहाउस बनाने का रिस्क भी है, खासकर ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताओं के बीच।
भविष्य का नज़ारा
आगे देखें तो, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, पॉलिसी का सपोर्ट और ई-कॉमर्स (E-commerce) व मैन्युफैक्चरिंग की लगातार बढ़ती मांग के चलते इंडिया का वेयरहाउसिंग सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ता रहेगा। यह उम्मीद की जा रही है कि 2027 तक ग्रेड A वेयरहाउसिंग स्टॉक 400 मिलियन वर्ग फुट और 2030 तक 500 मिलियन वर्ग फुट से ऊपर निकल जाएगा। ओवरऑल रियल एस्टेट मार्केट 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर (USD 1 trillion) तक पहुंच सकता है, जिसमें इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेगमेंट की भूमिका अहम होगी।