टैक्स की पुरानी बाधाएं अब दूर
भारत सरकार के इस अहम फैसले से भारत में काम कर रही विदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों, खासकर Apple के लिए ग्रोथ के रास्ते खुल गए हैं। आपको बता दें कि 2022 के बाद से भारत में Apple का मार्केट शेयर दोगुना हो गया है और अब दुनिया भर में बिकने वाले iPhones का 25% यहीं बनता है, जो दो साल पहले के मुकाबले चार गुना है। Apple का मार्केट कैप लगभग $3.81 ट्रिलियन है और इसका P/E रेश्यो करीब 32.80 है। कंपनी का स्टॉक लगभग $257.08 पर ट्रेड कर रहा है और इसका औसत डेली वॉल्यूम करीब 44.81 मिलियन शेयर्स का है, जो इसकी बाजार में मजबूत पकड़ को दिखाता है।
निवेश पर 'बिजनेस कनेक्शन' टैक्स का डर खत्म
पहले भारतीय टैक्स कानून एक बड़ी रुकावट थे। दूसरी मैन्युफैक्चरिंग हब की तुलना में, विदेशी कंपनियां जो लोकल कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को महंगी मशीनरी देती थीं, उन्हें 'बिजनेस कनेक्शन' टैक्स का खतरा रहता था। इसका मतलब था कि उन्हें यहां के मुनाफे पर भी टैक्स देना पड़ सकता था। इसी वजह से Foxconn और Tata जैसी कंपनियां खुद ही भारी मशीनरी का खर्चा उठा रही थीं।
लेकिन अब, सरकार ने कस्टम-बॉन्डेड ज़ोन (तकनीकी रूप से भारत के कस्टम क्षेत्र के बाहर के इलाके, जो मुख्य रूप से एक्सपोर्ट पर फोकस करते हैं) में इस टैक्स को खत्म कर दिया है। यह छूट 2030-31 के फाइनेंशियल ईयर तक लागू रहेगी। इससे भारत की एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं मजबूत होंगी और हम ग्लोबल सप्लाई चेन में और गहराई से जुड़ेंगे।
भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का सपना मजबूत
यह नीतिगत बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' विजन के तहत है, जिसका मकसद भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र बनाना है। बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) जैसी पहलों के लिए फंड भी बढ़ाया गया है। ये प्रोग्राम डोमेस्टिक प्रोडक्शन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डेवलपमेंट और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर देते हैं। पहले से लागू 15% कॉर्पोरेट टैक्स दर जैसी छूटों ने भी औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए जमीन तैयार की है।
विशेषज्ञों का भरोसा बढ़ा, भविष्य उज्ज्वल
इंडस्ट्री एनालिस्ट्स इस टैक्स राहत को विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाला एक अहम फैक्टर मान रहे हैं। BMR Legal के पार्टनर Shankey Agrawal का कहना है कि यह छूट डील-ब्रेकिंग जोखिमों को खत्म करती है, जिससे कंपनियां तेजी से अपना प्रोडक्शन बढ़ा सकती हैं। यह कदम Apple की चीन पर निर्भरता कम करने और अपनी मैन्युफैक्चरिंग को दुनिया भर में फैलाने की रणनीति का समर्थन करता है। उम्मीद है कि इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में और ज्यादा फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) आएगा, जिससे टेक्नोलॉजी में तरक्की और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।