Apple को भारत में बड़ी राहत! टैक्स की चिंता खत्म, मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह आसान

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Apple को भारत में बड़ी राहत! टैक्स की चिंता खत्म, मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह आसान
Overview

भारत सरकार ने Apple जैसी विदेशी कंपनियों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई की जाने वाली मशीनरी पर **5 साल** के लिए इनकम टैक्स से छूट दे दी है। इस फैसले से Apple की भारत में निवेश बढ़ाने और प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ाने की राह आसान हो गई है, साथ ही यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा बूस्ट है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

टैक्स की पुरानी बाधाएं अब दूर

भारत सरकार के इस अहम फैसले से भारत में काम कर रही विदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों, खासकर Apple के लिए ग्रोथ के रास्ते खुल गए हैं। आपको बता दें कि 2022 के बाद से भारत में Apple का मार्केट शेयर दोगुना हो गया है और अब दुनिया भर में बिकने वाले iPhones का 25% यहीं बनता है, जो दो साल पहले के मुकाबले चार गुना है। Apple का मार्केट कैप लगभग $3.81 ट्रिलियन है और इसका P/E रेश्यो करीब 32.80 है। कंपनी का स्टॉक लगभग $257.08 पर ट्रेड कर रहा है और इसका औसत डेली वॉल्यूम करीब 44.81 मिलियन शेयर्स का है, जो इसकी बाजार में मजबूत पकड़ को दिखाता है।

निवेश पर 'बिजनेस कनेक्शन' टैक्स का डर खत्म

पहले भारतीय टैक्स कानून एक बड़ी रुकावट थे। दूसरी मैन्युफैक्चरिंग हब की तुलना में, विदेशी कंपनियां जो लोकल कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को महंगी मशीनरी देती थीं, उन्हें 'बिजनेस कनेक्शन' टैक्स का खतरा रहता था। इसका मतलब था कि उन्हें यहां के मुनाफे पर भी टैक्स देना पड़ सकता था। इसी वजह से Foxconn और Tata जैसी कंपनियां खुद ही भारी मशीनरी का खर्चा उठा रही थीं।

लेकिन अब, सरकार ने कस्टम-बॉन्डेड ज़ोन (तकनीकी रूप से भारत के कस्टम क्षेत्र के बाहर के इलाके, जो मुख्य रूप से एक्सपोर्ट पर फोकस करते हैं) में इस टैक्स को खत्म कर दिया है। यह छूट 2030-31 के फाइनेंशियल ईयर तक लागू रहेगी। इससे भारत की एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं मजबूत होंगी और हम ग्लोबल सप्लाई चेन में और गहराई से जुड़ेंगे।

भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का सपना मजबूत

यह नीतिगत बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' विजन के तहत है, जिसका मकसद भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र बनाना है। बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) जैसी पहलों के लिए फंड भी बढ़ाया गया है। ये प्रोग्राम डोमेस्टिक प्रोडक्शन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डेवलपमेंट और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर देते हैं। पहले से लागू 15% कॉर्पोरेट टैक्स दर जैसी छूटों ने भी औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए जमीन तैयार की है।

विशेषज्ञों का भरोसा बढ़ा, भविष्य उज्ज्वल

इंडस्ट्री एनालिस्ट्स इस टैक्स राहत को विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाला एक अहम फैक्टर मान रहे हैं। BMR Legal के पार्टनर Shankey Agrawal का कहना है कि यह छूट डील-ब्रेकिंग जोखिमों को खत्म करती है, जिससे कंपनियां तेजी से अपना प्रोडक्शन बढ़ा सकती हैं। यह कदम Apple की चीन पर निर्भरता कम करने और अपनी मैन्युफैक्चरिंग को दुनिया भर में फैलाने की रणनीति का समर्थन करता है। उम्मीद है कि इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में और ज्यादा फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) आएगा, जिससे टेक्नोलॉजी में तरक्की और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.