निर्यात में तूफानी तेजी, पर भविष्य की चिंताएं
भारत के 'मेड इन इंडिया' स्मार्टफोन शिपमेंट्स में 2025 में 8% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस शानदार ग्रोथ की मुख्य वजह 28% का एक्सपोर्ट सरज रहा, जो अब देश में बने कुल स्मार्टफोन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। यह एक्सपोर्ट सफलता भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए ग्लोबल मार्केट्स के बढ़ते महत्व को साफ दर्शाती है।
कौन हुए मालामाल? Apple असेंबलर्स की चांदी
निर्यात में आई इस तेजी का सीधा फायदा प्रमुख असेंबलर्स को हुआ, खासकर Apple के लिए फोन बनाने वाली कंपनियों को। Foxconn Hon Hai के एक्सपोर्ट वॉल्यूम में सालाना 48% का भारी इजाफा देखा गया, जबकि Tata Electronics ने भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। Samsung की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग से एक्सपोर्ट वॉल्यूम में 4% की मामूली बढ़ोतरी हुई। स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स की वजह से यह सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और FY26 तक भारत की दूसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी बनने का अनुमान है।
डोमेस्टिक फ्रंट पर Dixon Technologies का जलवा
घरेलू बाजार में, Dixon Technologies भारत की लीडिंग इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) प्रोवाइडर के तौर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर चुका है। 2025 में भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 19% हो गई, जो 2024 में 11% थी। यह 89% की ज़बरदस्त सालाना बढ़ोतरी Motorola, realme और Xiaomi जैसे ब्रांड्स से मिले ऑर्डर्स का नतीजा है। Bhagwati Products Limited (BPL) भी vivo, OPPO और realme के लिए प्रोडक्शन आउटसोर्सिंग से टॉप 5 मैन्युफैक्चरर्स में जगह बनाने में कामयाब रही। अप्रैल 2026 तक, Dixon Technologies का P/E रेश्यो लगभग 38.24 और मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹68,509.4 करोड़ था। वहीं, Hon Hai Precision Industry (Foxconn) का P/E रेश्यो लगभग 14.7 और मार्केट कैपिटलाइजेशन $99.31 बिलियन USD (अप्रैल 2026 में) दर्ज किया गया।
कंपोनेंट की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल मंदी का दोहरा वार
इतनी मजबूत शिपमेंट वॉल्यूम के बावजूद, इस सेक्टर को प्रॉफिट मार्जिन पर भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। Q1 2026 में मेमोरी और स्टोरेज कंपोनेंट्स की कीमतों में तिमाही-दर-तिमाही लगभग 90% का बड़ा उछाल आया है और आगे भी इनके और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे रॉ मटेरियल की लागत काफी बढ़ गई है। यह कॉस्ट इन्फ्लेशन मैन्युफैक्चरर्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है, खासकर लो-एंड मार्केट सेगमेंट में जहां ग्राहकों पर पूरी बढ़ी हुई कीमत डालना आसान नहीं होता। इन अंदरूनी लागत की दिक्कतों के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट की खराब तस्वीर भी चिंता बढ़ा रही है।
ग्लोबल मार्केट में गिरावट और कंसंट्रेशन रिस्क का साया
साल 2026 में ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में 12.9% की अनुमानित गिरावट भारत के एक्सपोर्ट-ड्रिवेन ग्रोथ के लिए सीधा खतरा है। ग्लोबल शिपमेंट्स एक दशक से अधिक समय में अपने सबसे निचले वार्षिक वॉल्यूम पर पहुंचने का अनुमान है। इस मंदी का सीधा असर भारत से होने वाले एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर पड़ेगा। इसके अलावा, कुछ बड़े क्लाइंट्स पर निर्भरता, जैसे Foxconn और Tata Electronics के लिए Apple, एक कॉन्सेंट्रेशन रिस्क पैदा करती है, जो ग्लोबल डाउनटर्न के दौरान और बढ़ सकता है। भू-राजनीतिक (geopolitical) कारण भी लॉजिस्टिक्स में संभावित बाधाएं पैदा कर सकते हैं।
एनालिस्ट्स की राय बंटी, वैल्यूएशन पर सवाल
Dixon Technologies को लेकर एनालिस्ट्स का नजरिया आम तौर पर पॉजिटिव है, जिसमें 'Buy' रेटिंग का कंसेंसस है और प्राइस टारगेट औसतन ₹11,000 से ₹14,000 के बीच है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स की 'Hold' या 'Sell' रेटिंग्स भी हैं, जो भविष्य के वैल्यूएशन को लेकर अलग-अलग विचारों को दर्शाती हैं। Foxconn का Dixon की तुलना में काफी कम P/E रेश्यो, बड़े पैमाने और Apple सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, मार्केट की अलग-अलग उम्मीदों को इंगित करता है।
सरकार की पहलों से भविष्य को सहारा
सरकार की पहलों, जिनमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) शामिल हैं, का इस सेक्टर के विस्तार में सपोर्ट जारी है। स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में सुधार, बजट सपोर्ट और फॉरेन इन्वेस्टमेंट रूल्स में ढील सरकारी समर्थन को और मजबूत करते हैं। ये नीतियां भारत के लिए ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने और सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई करने के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि डोमेस्टिक EMS प्लेयर्स बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी दीर्घकालिक सफलता असेंबली से परे क्षमताएं विकसित करने और इम्पोर्ट पर निर्भरता को कम करने पर निर्भर करती है। बड़े पैमाने पर डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन पर जोर एक स्पष्ट महत्वाकांक्षा है, लेकिन तत्काल चुनौतियां ग्लोबल मार्केट में संकुचन और इनपुट लागत में बढ़ोतरी से उत्पन्न होती हैं।
