भारत की चिप क्रांति के पीछे इन सप्लायर्स का है हाथ
'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है। इस मिशन को कामयाब बनाने के लिए भारी भरकम निवेश वाली फैब (fab) यूनिट्स के साथ-साथ रॉ मैटेरियल, केमिकल और गैस सप्लायर्स का एक मजबूत नेटवर्क भी बेहद जरूरी है। ₹10 लाख करोड़ के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में तीन भारतीय कंपनियां खास भूमिका निभा रही हैं:
Acutaas Chemicals: चिप बनाने के लिए जरूरी केमिकल्स का किंग
Acutaas Chemicals सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) के लिए जरूरी इनपुट्स (inputs) की एक अहम सप्लायर के तौर पर उभर रही है। कंपनी की सब्सिडियरी (subsidiary) बाबा फाइन केमिकल्स, सेमीकंडक्टर-ग्रेड फोटोरेसिस्ट केमिकल्स (photoresist chemicals) बनाने वाली भारत की एकमात्र कंपनी है। ये बेहद शुद्ध रसायन चिप निर्माण की फोटोलिथोग्राफी (photolithography) प्रक्रिया के लिए अनिवार्य हैं। Acutaas अपने ज्वाइंट वेंचर (joint venture) Indichem के जरिए दक्षिण कोरिया की J & Materials के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपने काम का विस्तार कर रही है। यह वेंचर ₹130-140 करोड़ का निवेश कर रहा है ताकि एशियाई बाजारों को एडवांस्ड (advanced) सेमीकंडक्टर केमिकल्स सप्लाई किए जा सकें। कंपनी ने शानदार ग्रोथ दिखाई है, जहां FY26 में रेवेन्यू (revenue) 33% बढ़कर ₹1,339 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट (net profit) 122% उछलकर ₹356 करोड़ तक पहुंच गया।
Archean Chemicals: ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए सिलिकॉन कार्बाइड
स्पेशियलिटी मरीन केमिकल्स (specialty marine chemicals) की दिग्गज Archean Chemicals अपनी सब्सिडियरी SiCSem Private के माध्यम से सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) पावर डिवाइसेस में भारी निवेश कर रही है। ओडिशा में यह यूनिट SiC पावर डिवाइसेस और MOSFETs का उत्पादन करेगी, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स (renewable energy systems) और डेटा सेंटर्स (data centers) जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स (components) हैं। UK-आधारित Clas-SiC Wafer Fab में निवेश से Archean को एडवांस्ड SiC टेक्नोलॉजी तक पहुंच मिली है। हालांकि, हालिया फाइनेंशियल्स (financials) मिले-जुले रहे हैं, जिसमें 9MFY26 में EBITDA 15% घटकर ₹217 करोड़ रहा, लेकिन सेमीकंडक्टर के हाई-ग्रोथ (high-growth) एप्लिकेशन्स (applications) पर इसका फोकस भारत को तकनीकी आजादी की ओर ले जाने में इसे एक अहम खिलाड़ी बनाता है।
Stallion India: हाई-प्योरिटी गैसेस की सप्लाई
रेफ्रिजरेंट्स (refrigerants) और इंडस्ट्रियल गैसेस (industrial gases) की निर्माता Stallion India अब लिक्विड हीलियम (liquid helium) सहित हाई-प्योरिटी गैसेस (high-purity gases) के मार्केट में कदम रख रही है, जो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद क्रिटिकल (critical) हैं। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए खलार और मंबट्टू स्थित अपनी यूनिट्स का विस्तार कर रही है, जिसका लक्ष्य लिक्विड हीलियम की सालाना 1,200 मीट्रिक टन प्रोसेसिंग क्षमता हासिल करना है। टेक्नोलॉजी और सोर्सिंग के लिए इंटरनेशनल फर्मों के साथ हुए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (strategic partnerships) का मकसद एक मजबूत सप्लाई चेन बनाना है। Stallion India का रेवेन्यू 9MFY26 में 42% बढ़कर ₹321 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 63% की छलांग लगाकर ₹31 करोड़ पर पहुंच गया। हाई-मार्जिन (high-margin) सेमीकंडक्टर गैसेस में इसका विस्तार इसके प्रॉफिट को काफी बढ़ाने की उम्मीद है।
एग्जीक्यूशन ही कुंजी है
इस बड़ी मार्केट अपॉर्च्युनिटी (market opportunity) को हासिल करना पूरी तरह से मजबूत एग्जीक्यूशन (execution) पर निर्भर करता है। इन कंपनियों को समय पर अपनी कैपेसिटी (capacity) बढ़ानी होगी, क्लाइंट्स (clients) को जीतना होगा और जटिल ग्लोबल सप्लाई चेन्स (supply chains) को मैनेज करना होगा। निवेशक इन फर्मों पर कड़ी नजर रख रहे हैं, क्योंकि ये भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर सेक्टर में अपने महत्वाकांक्षी विकास को आगे बढ़ा रही हैं।
