भारत की बड़ी ऊर्जा क्रांति
भारत का पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर 2035 तक ₹11.2 लाख करोड़ के भारी-भरकम निवेश के साथ खुद को आधुनिक बनाने की राह पर है। इस योजना का एक बड़ा हिस्सा 35 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने पर केंद्रित है, जिसमें से 10 करोड़ मीटर अगले दो फाइनेंशियल ईयर (FY27) तक लगाने का लक्ष्य है। इस बड़े कदम से बिलिंग की सटीकता बढ़ेगी और बिजली चोरी रुकेगी।
Power Grid Corporation का रोल और शेयर
इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Power Grid Corporation of India (POWERGRID) के शेयर फिलहाल NSE पर ₹316-319 के दायरे में कारोबार कर रहे हैं। ₹2.97 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाली इस कंपनी का P/E रेश्यो 17.4 से 20.25 के बीच है। कंपनी को रेगुलेटेड सेक्टर में होने का फायदा मिलता है, जिससे स्थिर लेकिन मामूली रिटर्न की उम्मीद है। ईयर-टू-डेट (YTD) और पिछले छह महीनों में शेयर में लगभग 18% और 17% की तेजी देखी गई है। हालांकि, सेक्टर का ओवरऑल आउटलुक अभी भी काफी संभावनाएं और जोखिम दोनों दिखाता है।
नुकसान पर लगाम, पर पूरी सफलता दूर
स्मार्ट मीटर लगाने के बावजूद, एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस को कम करने का लक्ष्य पाना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में राष्ट्रीय औसत 15.04% रहा, जो कि रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के 12-15% के लक्ष्य से थोड़ा ऊपर है। कुछ राज्य जैसे केरल और गुजरात में यह नुकसान सिंगल डिजिट में है, जबकि मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में यह 19% से भी अधिक है। यह दिखाता है कि प्रगति एक समान नहीं है।
आने वाले पांच सालों में भारत की ऊर्जा मांग में 6-6.5% की सालाना वृद्धि का अनुमान है, जिसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। अगले एक दशक में पावर सेक्टर में कुल ₹40 लाख करोड़ के निवेश की संभावना है।
स्मार्ट मीटर अपनाने में अड़चनें
इतनी बड़ी योजना के बावजूद, स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उनसे मिलने वाले फायदों को हकीकत में बदलना आसान नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम्स) इन मीटरों से निकलने वाले डेटा का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वे उपलब्ध जानकारी के चौथाई से भी कम का उपयोग करती हैं। इसके पीछे खास एनालिटिक्स टीम और विशेषज्ञता की कमी एक बड़ी वजह है।
उपभोक्ता भी प्राइवेसी की चिंताओं, गलत सूचनाओं और बिलिंग को लेकर आशंकाओं के चलते स्मार्ट मीटर लगवाने में झिझक रहे हैं। इससे योजना की रफ्तार धीमी पड़ रही है और बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान की जरूरत है। पुराने IT सिस्टम के साथ स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम को जोड़ना और विभिन्न इलाकों में भरोसेमंद सेवा सुनिश्चित करना भी बड़ी तकनीकी चुनौतियां हैं।
साथ ही, सरकारी डिस्कॉम्स की खराब वित्तीय सेहत और बढ़ता कर्ज एक बुनियादी कमजोरी है, जो नई टेक्नोलॉजी में उनके निवेश और प्रबंधन की क्षमता को सीमित कर सकती है।
आगे का रास्ता
विश्लेषक Power Grid Corporation of India के लिए सकारात्मक रुझान देख रहे हैं, कुछ ने खरीदारी की सलाह देते हुए ₹340 का टारगेट प्राइस दिया है। हालांकि, Q4 FY26 के अनुमान बताते हैं कि कंपनी के प्रॉफिट और बिक्री में साल-दर-साल केवल 5-6% की मामूली वृद्धि हो सकती है।
सरकार का लक्ष्य FY27 तक 10 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाना है। इनकी सफलता का असली पैमाना लॉस कम करना, मांग का प्रबंधन करना और राजस्व बढ़ाना होगा। इसके लिए डेटा एनालिटिक्स की क्षमता और उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता बहुत जरूरी है। सेक्टर का भविष्य सिर्फ निवेश पर नहीं, बल्कि इन गहरी परिचालन और उपभोक्ता-संबंधी मुद्दों को हल करने पर निर्भर करेगा।
