India Road Sector: निर्माण की रफ्तार दशकों में सबसे धीमी, पर टोल से कमाई बंपर!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Road Sector: निर्माण की रफ्तार दशकों में सबसे धीमी, पर टोल से कमाई बंपर!
Overview

भारत में सड़कें बनाने की रफ्तार पिछले एक दशक में सबसे धीमी रहने का अनुमान है। प्रोजेक्ट्स की मंजूरी मिलने की गति में आई भारी कमी और NHAI तथा MoRTH की ओर से प्रोजेक्ट अवार्ड्स में सुस्ती इसका मुख्य कारण है। वहीं, दूसरी ओर, पहले से बनी सड़कों पर टोल कलेक्शन (Toll Collection) लगातार बढ़ रहा है, जो सेक्टर के लिए एक उम्मीद की किरण है।

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रोड सेक्टर में दोहरी चाल: निर्माण धीमा, कमाई तेज

भारत का रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर (Road Infrastructure) सेक्टर इस वक्त एक दिलचस्प दौर से गुजर रहा है। जहां एक तरफ नई सड़कें बनाने की रफ्तार पिछले दस सालों में सबसे कम रहने का अनुमान है, वहीं दूसरी तरफ पहले से चालू सड़कों से टोल (Toll) के जरिए होने वाली कमाई लगातार मजबूत बनी हुई है। यह विरोधाभास सेक्टर के दोहरे चरित्र को दिखाता है - नए विकास के लिए मुश्किल माहौल, लेकिन ऑपरेशनल (Operational) संपत्तियों का मजबूत प्रदर्शन।

निर्माण की रफ्तार पर ब्रेक

विश्लेषकों का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY2027) तक भारत में सड़क निर्माण की गति घटकर 25 किलोमीटर प्रतिदिन तक आ सकती है। यह पिछले दस सालों का सबसे निचला स्तर होगा। FY2026 के पहले आठ महीनों में तो यह रफ्तार और भी कम, यानी 21.8 किलोमीटर प्रतिदिन रही। इस धीमी गति का सीधा असर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) जैसे सरकारी विभागों की ओर से प्रोजेक्ट्स मिलने की गति में आई भारी कमी पर पड़ रहा है। अनुमान है कि FY2025-26 में प्रोजेक्ट अवार्ड्स पिछले साल के मुकाबले लगभग सपाट (Flat) रहेंगे, जो FY2020-21 से FY2022-23 के स्तर से काफी कम है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन (E&C) सेक्टर में ऑर्डर इनफ्लो (Order Inflow) Q3FY26 में पिछले साल के मुकाबले 23% घटा है। वहीं, FY2025 में रोड सेक्टर के ऑर्डर पिछले 6 सालों (FY2018) के मुकाबले आधे हो गए हैं। MoRTH के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन (Execution) में भी देरी देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण लंबे समय तक चला मानसून और प्रोजेक्ट्स के ऑर्डर बुक का सिकुड़ना है।

टोल कलेक्शन में मजबूती बरकरार

नए प्रोजेक्ट्स की कमी के बावजूद, जो सड़कें पहले से चालू हैं, उनसे होने वाली कमाई यानी टोल कलेक्शन एक मजबूत सहारा बना हुआ है। ICRA का अनुमान है कि FY2026 में वाहनों के ट्रैफिक में 4-5% की ग्रोथ देखी जाएगी, जिससे टोल कलेक्शन में 5-9% की बढ़ोतरी हो सकती है। FY2025 में टोल कलेक्शन में 6% की वृद्धि देखी गई थी। इसके अलावा, महंगाई के नियंत्रण में रहने की उम्मीद के चलते FY2027 में टोल दरों में मामूली बढ़ोतरी की भी संभावना है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) इन ऑपरेशनल एसेट्स को मोनेटाइज (Monetize) करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये इन्वेस्टर से पैसा जुटाकर आय-उत्पन्न करने वाले सड़क खंडों का अधिग्रहण करते हैं और डेवलपर्स के लिए कैपिटल रीसाइक्लिंग (Capital Recycling) की सुविधा देते हैं। InvITs में एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भारी उछाल आने का अनुमान है, जो इन स्थिर, एन्युटी जैसे रिटर्न (Annuity-like Returns) में निवेशक के भरोसे को दिखाता है।

आंकड़ों का विश्लेषण

भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का वैल्यू करीब USD 204 बिलियन (2024) है और इसके 2029 तक USD 322 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, खासकर सड़कों का दबदबा है, जो 2025 में बाजार हिस्सेदारी का 38.89% था। हालांकि, रोड कंस्ट्रक्शन सेगमेंट वर्तमान में एक साइक्लिकल डाउनटर्न (Cyclical Downturn) का सामना कर रहा है। अगस्त 2025 में कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर आउटपुट में 13 महीने की सबसे अधिक 6.3% ग्रोथ देखी गई, लेकिन हाईवे प्रोजेक्ट अवार्ड्स और निर्माण की गति ऐतिहासिक उच्च स्तर से काफी पिछड़ गई है। उदाहरण के लिए, FY2019-FY2024 के बीच निर्माण की औसत गति 31 किमी प्रतिदिन थी, जो कि पिछले पांच सालों से काफी बेहतर थी, लेकिन अब के अनुमान एक उलटफेर का संकेत दे रहे हैं। NHAI ने FY2017-18 में रिकॉर्ड 7,400 किमी सड़कों का अवार्ड किया था, जबकि FY2025-26 के लिए यह आंकड़ा 7,500 किमी से कम रहने की उम्मीद है। मौजूदा माहौल में बिडिंग डिस्काउंट (Bidding Discount) काफी ज्यादा है, पिछले 3 सालों में लगभग 71% EPC प्रोजेक्ट्स बेस प्राइस पर 20% से अधिक के डिस्काउंट पर दिए गए हैं।

डेवलपर्स के लिए चिंता का सबब

प्रोजेक्ट अवार्ड्स में लगातार गिरावट रोड डेवलपर्स के लिए बड़ी चिंता का विषय है। सिकुड़ती ऑर्डर बुक्स को भरने के लिए उन्हें आक्रामक बिडिंग करनी पड़ रही है, जिससे उनके मार्जिन (Margins) पर दबाव बढ़ रहा है। खासकर मध्यम आकार की कंपनियों को ऑर्डर फ्लो कम होने और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सेक्टर को सता रही मुख्य चिंताओं में जमीन अधिग्रहण में लंबा समय लगना, पर्यावरण मंजूरी और रेगुलेटरी बाधाएं शामिल हैं। फाइनेंसिंग (Financing) भी एक चुनौती बनी हुई है, क्योंकि सरकारी एजेंसियां कभी-कभी भुगतानों में देरी कर देती हैं, जिससे ठेकेदारों के कैश फ्लो (Cash Flow) पर असर पड़ता है। इसके अलावा, सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मानसून का लंबा असर बजट को बढ़ा सकता है।

भविष्य का रास्ता

हालांकि FY2026 और FY2027 में निर्माण की रफ्तार धीमी रहने का अनुमान है, विश्लेषकों को FY2027 के बाद धीरे-धीरे रिकवरी की उम्मीद है। यह मजबूत अंतर्निहित मांग (Underlying Demand) और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी पर सरकार के निरंतर फोकस से प्रेरित होगी। InvITs के जरिए ऑपरेशनल एसेट्स का मोनेटाइजेशन जारी रहने की उम्मीद है, जो स्थिर कमाई का आधार प्रदान करेगा। हालांकि, प्रतिस्पर्धा को कम करने, डेवलपर्स के रेवेन्यू में स्पष्टता लाने और सेक्टर की ग्रोथ को बनाए रखने के लिए MoRTH और NHAI से प्रोजेक्ट अवार्ड्स में सार्थक बढ़ोतरी होना महत्वपूर्ण है।

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