परमाणु सेक्टर में बड़ा बदलाव: नीति और भविष्य की राह
भारत सरकार ने 6 दशक पुराने परमाणु ऊर्जा के सरकारी एकाधिकार को खत्म कर दिया है। SHANTI Act के लागू होने से अब प्राइवेट और विदेशी कंपनियाँ परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में 49% तक इक्विटी (Equity) रख सकेंगी। इस ऐतिहासिक कदम से ₹2 लाख करोड़ की एक नई इंडस्ट्री के उभरने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जिसके लिए भारी निवेश और विशेष विनिर्माण क्षमताओं की ज़रूरत होगी। बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, सोलर और विंड एनर्जी के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा भी अहम भूमिका निभाएगी। SHANTI Act से सेक्टर में कॉर्पोरेट निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) के विकास में तेजी आएगी।
मुकुल अग्रवाल का इंफ्रास्ट्रक्चर पर दांव: HCC का बड़ा दांव
जाने-माने निवेशक मुकुल अग्रवाल, जो ग्रोथ ओरिएंटेड निवेश के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेयर्स पर नज़रें गड़ाई हैं। उनके पोर्टफोलियो में PTC Industries, WPIL Ltd. और KRN Heat Exchanger जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो परमाणु ऊर्जा से जुड़े कंपोनेंट्स बनाती हैं। लेकिन उनका सबसे बड़ा दांव Hindustan Construction Company (HCC) पर है। HCC, जिसने पहले भी भारत की परमाणु क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, अब प्राइवेट सेक्टर में इस क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। हाल के 6 महीनों में स्टॉक में 25% की गिरावट आई है और यह अपने ऑल-टाइम हाई से 81% नीचे कारोबार कर रहा है। HCC का मार्केट कैप लगभग ₹4,896 करोड़ है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी की सेल्स ₹2,980 करोड़ रही। कंपनी ने अपना कर्ज कम किया है, लेकिन 29.5x के हाई P/E रेश्यो (जो इंडस्ट्री मीडियन 16x से काफी ऊपर है), 5 साल की खराब सेल्स ग्रोथ ( -9.91%), कम रिटर्न ऑन इक्विटी और प्रमोटर की बड़ी होल्डिंग प्लेज (Pledge) होने जैसी चिंताएं बनी हुई हैं।
आशीष कचोलिया की स्पेशलिटी कंपोनेंट रणनीति
वहीं, आशीष कचोलिया 'Picks and Shovels' रणनीति अपना रहे हैं, जिसमें वे स्पेशलिटी कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं। उनके पोर्टफोलियो में Balu Forge Industries, Aeroflex Industries, TechEra Engineering और Knowledge Marine जैसी कंपनियां हैं। उनकी एक अहम होल्डिंग Walchandnagar Industries है, जो न्यूक्लियर रिएक्टर वेसल्स जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स की पुरानी सप्लायर है। कई सालों के नुकसान और रेवेन्यू में गिरावट के बाद, Walchandnagar Industries ने Q3 FY26 में एक बड़ा टर्नअराउंड (Turnaround) दिखाया है। रेवेन्यू में 37% की साल-दर-साल वृद्धि के साथ यह ₹80.95 करोड़ रहा, और कंपनी ने पिछले साल के नुकसान के मुकाबले ₹4.66 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि, कंपनी की फाइनेंशियल हिस्ट्री में लगातार नुकसान और रेवेन्यू में गिरावट का इतिहास रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में सेल्स ₹259 करोड़ और नेट लॉस ₹86 करोड़ रहा था। कंपनी का P/E रेश्यो नेगेटिव है, जो अभी भी नुकसान में होने को दर्शाता है। साथ ही, इसका इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो कम है और 5 साल की सेल्स ग्रोथ भी खराब रही है। कंपनी के पास ₹670 करोड़ का ऑर्डर बुक है (शुगर सेक्टर को छोड़कर)।
वैल्युएशन (Valuation) की असमानता और पीयर तुलना
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वैल्युएशन को लेकर मिली-जुली तस्वीर दिख रही है। Nifty India Infrastructure Index का P/E 17.2 है, जबकि Nifty India Infrastructure & Logistics Index का P/E 28.04 से 31.82 के बीच है। HCC का मौजूदा P/E 12.5-16.8x के आसपास है, जो इसे व्यापक औद्योगिक पीयर्स के करीब लाता है। लेकिन 29.5x का प्रीमियम वैल्युएशन, इसके वित्तीय स्थिति के बावजूद, भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है। Walchandnagar Industries, अपने नेगेटिव P/E के साथ, एक अलग वैल्युएशन चुनौती पेश करती है। इंजीनियरिंग सेक्टर की अन्य लाभ कमाने वाली कंपनियों, जैसे Rishi Laser और Atam Valves, का P/E 15-16x के बीच है, जो Walchandnagar Industries के लिए वर्तमान में कमाई के आधार पर वैल्यूएशन को सही ठहराना मुश्किल बनाता है।
फोरेंसिक बेयर केस: वित्तीय स्थिरता पर सवाल
नीतिगत बदलावों और निवेशकों के भरोसे के बावजूद, HCC और Walchandnagar Industries जैसे प्रमुख प्लेयर्स की वित्तीय स्थिरता एक बड़ी चिंता बनी हुई है। HCC का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.14 है और प्रमोटर की 73.3% होल्डिंग प्लेज है, जो उच्च लीवरेज और संभावित वित्तीय दबाव का संकेत देता है। कंपनी की पिछली सेल्स ग्रोथ खराब रही है, और इसने हाई डेप्टर्स डेज़ (Debtors Days) और उधारी की ऊंची लागत दिखाई है। Walchandnagar Industries, हालिया प्रॉफिट टर्नअराउंड के बावजूद, नुकसान के इतिहास और खराब सेल्स ग्रोथ से जूझ रही है। प्रमोटर होल्डिंग में गिरावट आई है और 49.2% शेयर प्लेज हैं। इस सेक्टर को भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) की ज़रूरत है और कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने में निष्पादन जोखिम (Execution Risks) का सामना करना पड़ सकता है। Walchandnagar के लिए, स्पेशलिटी सेगमेंट पर निर्भरता, जहां मार्जिन अधिक हो सकता है, वहीं सप्लाई चेन में बाधाओं या मांग में बदलाव से भी यह असुरक्षित हो सकती है। दोनों कंपनियों के ऐतिहासिक नेट लॉस और नेगेटिव रिटर्न ऑन इक्विटी बताते हैं कि बाजार वर्तमान वित्तीय स्वास्थ्य के बजाय भविष्य के प्रदर्शन पर भारी दांव लगा रहा है।
भविष्य का आउटलुक
2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय प्रयास है। SMRs पर बढ़ता फोकस एक महत्वपूर्ण तकनीकी अवसर प्रस्तुत करता है, जो नए प्रवेशकों के लिए कैपिटल की बाधाओं को कम कर सकता है। हालांकि, इन लक्ष्यों की पूर्ति लगातार नियामक कार्यान्वयन, मजबूत फाइनेंसिंग तंत्र और HCC व Walchandnagar Industries जैसी कंपनियों की अपनी वित्तीय चुनौतियों से निपटने और बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स को प्रभावी ढंग से पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। निवेशकों की भावना, भारत के परमाणु पुनर्जागरण की दीर्घकालिक क्षमता और कंपनियों की वर्तमान वित्तीय कमजोरियों के बीच बंटी हुई दिख रही है। आने वाले कुछ साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि प्रमुख निवेशकों के ये रणनीतिक दांव स्थायी मूल्य निर्माण में तब्दील होते हैं या नहीं।