मजूरी में बढ़ोतरी का सीधा असर
यूपी सरकार ने अनस्किल्ड वर्कर्स के लिए न्यूनतम मजूरी को बढ़ाकर ₹13,690 प्रति माह और स्किल्ड वर्कर्स के लिए ₹16,668 प्रति माह कर दिया है। यह लेबर कॉस्ट में सीधा इजाफा है, जिसका असर उन कंपनियों पर ज्यादा पड़ेगा जो अपने वर्कफोर्स पर काफी निर्भर हैं। Maruti Suzuki, Dixon Technologies, और Samvardhana Motherson International जैसी बड़ी कंपनियाँ इस बढ़ोतरी से प्रभावित हो सकती हैं।
'मेक इन इंडिया' की लागत प्रतिस्पर्धा पर सवाल
भारत, चीन के विकल्प के तौर पर एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है, जिसका एक बड़ा कारण यहाँ की लागत प्रतिस्पर्धा है। लेकिन बढ़ती लेबर कॉस्ट और लॉजिस्टिक्स (जो GDP का 13-14% है, जबकि विकसित देशों में 8-10% है) इस फायदे को कम कर रही हैं। 'मेक इन इंडिया' ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और नियमों को आसान बनाने में मदद की है, लेकिन बढ़ती परिचालन लागत एक बड़ी चुनौती है।
ऑटोमेशन और डाइवर्सिफिकेशन का विकल्प
लेबर कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी कंपनियों को ऑटोमेशन (Automation) और परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकती है। इससे रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ सकता है। साथ ही, कंपनियां अपनी प्रोडक्शन साइट्स पर निर्भरता कम करने के लिए डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) की रणनीति पर भी ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।
आगे क्या?
नेशनल लेबर कोड्स के तहत आगे भी मजदूरी में बदलाव की संभावना है। ऐसी कंपनियाँ जो विविध ऑपरेशन्स, मजबूत सप्लाई चेन मैनेजमेंट और स्पष्ट ऑटोमेशन योजनाओं के साथ काम कर रही हैं, वे बढ़ती लागतों को बेहतर ढंग से संभाल पाएंगी। भारत में मैन्युफैक्चरिंग निवेश को लंबे समय तक आकर्षित करने के लिए सरकार को प्रतिस्पर्धी लेबर कॉस्ट के साथ-साथ उत्पादकता सुधार, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस में आसानी सुनिश्चित करनी होगी।