MAKE 2026 कॉन्फ्रेंस में इंडस्ट्री लीडर्स ने भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का रोडमैप पेश किया है। इसमें डेटा सेंटर क्षमता, स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर खास जोर दिया गया है।
MAKE 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत की औद्योगिक रणनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं। अब फोकस केवल घरेलू उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को 'हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग' का ग्लोबल लीडर बनाने की तैयारी है।
AI और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की विस्तार योजना
भारत अपने डेटा सेंटर की क्षमता को 1.6 गीगावाट से बढ़ाकर 8 गीगावाट करने की तैयारी में है। यह विस्तार AI एडॉप्शन के लिए अनिवार्य है। हालांकि, इतनी बड़ी क्षमता के लिए भारी बिजली की खपत और एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम की जरूरत होगी। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो पावर मैनेजमेंट और एज कंप्यूटिंग में इनोवेशन ला रही हैं।
डिफेंस और सॉफ्टवेयर में आत्मनिर्भरता
डिफेंस सेक्टर में अब हार्डवेयर से ज्यादा फोकस सॉफ्टवेयर और AI-ड्रिवन सिस्टम पर है। 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत iDEX जैसे फ्रेमवर्क के जरिए प्राइवेट कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका मकसद तेजस फाइटर जेट और पिनाका रॉकेट सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म्स को और अधिक सक्षम बनाना है, जिससे निजी कंपनियों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे।
एनर्जी सिक्योरिटी और चुनौतियां
ऊर्जा इस पूरे बदलाव की नींव है। सरकार ने 1,500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पूर्व नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार, सफलता सरकार के इंसेंटिव्स के बजाय सही समय पर काम पूरा करने (Execution) पर निर्भर करेगी। पावर ग्रिड और फैसिलिटीज सेटअप में देरी प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ा सकती है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आने वाले समय में उन कंपनियों के शेयर प्रदर्शन पर नजर रखें जो डेटा सेंटर्स की बढ़ती लागत को कंट्रोल कर सकती हैं। डिफेंस सेक्टर में ऑर्डर एग्जीक्यूशन और रिन्यूएबल एनर्जी में प्रोजेक्ट कमीशनिंग की रफ्तार ही भविष्य की ग्रोथ तय करेगी।
