भारत के जेम एक्सपोर्ट्स में बड़ी उठापटक: सोना-हीरा धराशायी, चांदी-प्लैटिनम की तूफानी तेजी!

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत के जेम एक्सपोर्ट्स में बड़ी उठापटक: सोना-हीरा धराशायी, चांदी-प्लैटिनम की तूफानी तेजी!
Overview

भारत के जेम और ज्वेलरी एक्सपोर्ट्स (Gem and Jewellery Exports) अप्रैल 2026 में **9.07%** गिरकर **2.45 अरब डॉलर** पर आ गए। लेकिन इस कुल गिरावट के पीछे एक बड़ा उलटफेर छिपा है, जहाँ चांदी के गहनों के एक्सपोर्ट्स में **4 गुना** का उछाल आया और प्लैटिनम ज्वेलरी **90%** से ज़्यादा बढ़ी। वहीं, सोने के गहने और हीरे के एक्सपोर्ट्स बुरी तरह पिट गए।

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निर्यात में दिखा बड़ा अंतर, वजहें क्या हैं?

यह प्रदर्शन एक मिश्रित तस्वीर पेश करता है। जहाँ एक ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण पारंपरिक, ज़्यादा कीमत वाले आइटम दबाव में हैं, वहीं किफ़ायती और आधुनिक विकल्प तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अप्रैल 2026 में कुल जेम और ज्वेलरी निर्यात 9.07% की गिरावट के साथ 2.45 अरब डॉलर (लगभग ₹20,952 करोड़) रहा। इसी अवधि में इंपोर्ट्स (Imports) भी 9.54% घटकर 2.03 अरब डॉलर हो गया।

इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, अनिश्चित कीमतें और भू-राजनीतिक तनावों के चलते खरीदारों का सतर्क रवैया इस गिरावट का मुख्य कारण है। हालाँकि, निर्यात के आंकड़े एक बड़ा बदलाव दिखाते हैं।

किफ़ायती और फैशनेबल डिज़ाइन की मांग के चलते चांदी के गहनों का एक्सपोर्ट 4 गुना से ज़्यादा बढ़कर 268.38 मिलियन डॉलर पर पहुँच गया। वहीं, डेवलप्ड मार्केट्स में मांग और आधुनिक डिज़ाइन के दम पर प्लैटिनम ज्वेलरी का एक्सपोर्ट 90.29% उछलकर 22.10 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया।

इसके विपरीत, पारंपरिक सेगमेंट में गिरावट दिखी। कटे और पॉलिश किए हुए हीरे का एक्सपोर्ट ग्लोबल डिमांड में सुस्ती और इन्वेंट्री एडजस्टमेंट के कारण 19.65% गिरकर 890.91 मिलियन डॉलर पर आ गया। सादे सोने के गहनों का एक्सपोर्ट सोने की ऊंची कीमतों और ग्राहकों की घटती सामर्थ्य के चलते 47.06% लुढ़ककर 341.08 मिलियन डॉलर रहा। कुल मिलाकर, गोल्ड ज्वेलरी (स्टडेड आइटम्स सहित) का एक्सपोर्ट 21.77% घटकर 841.54 मिलियन डॉलर हो गया, हालांकि स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी एक्सपोर्ट्स में 16.02% की वृद्धि देखी गई। लैबोरेटरी में बने हीरे का एक्सपोर्ट भी प्राइसिंग प्रेशर और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण 15.53% घट गया।

ग्राहक सोच और वैश्विक दबाव

अप्रैल 2026 में सेक्टर का प्रदर्शन वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य से जुड़ा है। ऊंची महंगाई, अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित वृद्धि और मध्य पूर्व में तनाव ने वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता विश्वास को कम किया है। इसका असर लग्जरी सामानों पर पड़ा है। सोने की कीमतें, जो 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर के करीब रहीं, ने सोने के गहनों की सामर्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित किया।

वहीं, सोने और प्लैटिनम के बीच की बड़ी कीमत के अंतर ने प्लैटिनम को 'वैल्यू लग्जरी' खरीदारों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना दिया है। यह बदलाव प्लैटिनम ज्वेलरी की मज़बूत बिक्री में देखा जा सकता है। चीन का ज्वेलरी एक्सपोर्ट फरवरी 2026 में 826 मिलियन डॉलर था, और इटली एक प्रमुख वैश्विक प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।

सेक्टर के सामने जोखिम

कुछ मजबूत सेगमेंट के बावजूद, भारत के जेम और ज्वेलरी एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका जैसे बाज़ारों पर निर्भरता, टैरिफ की अनिश्चितताओं और संभावित नीतिगत बदलावों के कारण एक बड़ी कमजोरी है। प्राकृतिक और लैबोरेटरी में बने हीरों के बीच कीमत का बड़ा अंतर, साथ ही बाद वाले की बढ़ती पहुंच और नैतिक अपील, खासकर मिड-रेंज हीरों के लिए एक खतरा है। सोने की ऊंची कीमतें सादे सोने के गहनों की मांग को सीमित कर रही हैं। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक अस्थिरता लग्जरी सामानों पर खर्च को और कम कर सकती है।

भविष्य का नज़रिया और वैल्यूएशन

भारत के जेम और ज्वेलरी एक्सपोर्ट्स का भविष्य मिश्रित दिख रहा है। जबकि पॉलिश किए हुए हीरे और सादे सोने के गहनों को ऊंची कमोडिटी कीमतों और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं से जूझना पड़ सकता है, सिल्वर, प्लैटिनम और स्टडेड ज्वेलरी सेगमेंट किफ़ायतीपन, नए डिज़ाइन और फैशन ट्रेंड के कारण ग्रोथ के लिए तैयार हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल लग्जरी मार्केट में 2-4% की वृद्धि होगी। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, 2026 में कीमती धातुओं की कीमतों में 42% की बड़ी वृद्धि हो सकती है। कुल मिलाकर, भारतीय जेम और ज्वेलरी मार्केट के लंबे समय में 130 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.