Food Processing सेक्टर में ₹9,200 Cr का निवेश! PLI स्कीम से बढ़ी क्षमता, पर किसानों की आय और ग्लोबल कॉम्पिटिशन में चुनौती

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Food Processing सेक्टर में ₹9,200 Cr का निवेश! PLI स्कीम से बढ़ी क्षमता, पर किसानों की आय और ग्लोबल कॉम्पिटिशन में चुनौती
Overview

भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत 168 अप्रूव्ड कंपनियों ने **₹9,207 करोड़** का ज़बरदस्त निवेश किया है, जिससे नई प्रोसेसिंग क्षमता का भारी विस्तार हुआ है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) ने भी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है।

PLI स्कीम: निवेश का बंपर बूस्टर

प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम फॉर फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज (PLISFPI) के तहत, भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में कुल ₹9,207 करोड़ का निवेश आया है। 168 कंपनियों को इसके लिए मंजूरी मिली है। इस निवेश से पूरे देश में लगभग 35 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की नई प्रोसेसिंग और प्रिजर्वेशन (संरक्षण) क्षमता का निर्माण हुआ है। अब तक सरकार ₹2,714.79 करोड़ के इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन राशि) का भुगतान भी कर चुकी है।

इस स्कीम का खास पहलू यह है कि मंजूर किए गए आवेदकों में 69 माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) शामिल हैं। इसके अलावा, सहकारी संस्थाएं और ऑर्गेनिक (जैविक) फूड प्रोडक्ट्स पर फोकस करने वाली कंपनियां भी इसका लाभ उठा रही हैं। PLISFPI का लक्ष्य भारतीय फूड मैन्युफैक्चरर्स को ग्लोबल लीडर बनाना, भारतीय ब्रांड्स को दुनिया भर में प्रमोट करना, ऑफ-फार्म रोज़गार बढ़ाना और farm produce (खेती उपज) के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।

PMKSY से मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूती दे रही है। 31 जनवरी 2026 तक, 41 मेगा फूड पार्क और 401 कोल्ड चेन प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी मिली है। इनमें से 25 मेगा फूड पार्क और 302 कोल्ड चेन सुविधाएं अब चालू (operational) हो चुकी हैं। बाकी प्रोजेक्ट्स डेवलपमेंट के स्टेज पर हैं। इन पहलों से सरकार के उस लक्ष्य को बल मिल रहा है, जहां वह एक मज़बूत फूड प्रोसेसिंग इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है।

कुल मिलाकर, भारतीय फूड प्रोसेसिंग सेक्टर का आकार फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के अंत तक बढ़कर लगभग $535 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2023 में अनुमानित $336.4 बिलियन के मुकाबले एक बड़ी छलांग होगी। यह ग्रोथ डिमांड, एक्सपोर्ट और सरकारी नीतियों का नतीजा है।

पूरी क्षमता के इस्तेमाल में अभी भी गैप

PLISFPI और PMKSY के तहत हुए भारी निवेश और बढ़ी हुई क्षमता के बावजूद, सेक्टर अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने और किसानों की आय बढ़ाने में अभी भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य PLI स्कीम का एक अहम हिस्सा है। फलों और सब्जियों के मामले में, भारत की ओवरऑल फूड प्रोसेसिंग रेट्स (दरें) अभी भी ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से काफी नीचे हैं। इस गैप से waste (बर्बादी) कम करने और farm goods (कृषि उत्पादों) का मूल्य बढ़ाने के अवसर मिलते हैं।

FY2024-25 में कृषि और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट $49 बिलियन से ज़्यादा रहे। FY2025 में अकेले प्रोसेस्ड फूड का एक्सपोर्ट $12.5 बिलियन रहने का अनुमान है, जिसमें सालाना 15% की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, ग्लोबल फूड ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी अभी भी करीब 1.5% है, जो ग्लोबल लेवल पर और ज़्यादा कॉम्पिटिटिव (प्रतिस्पर्धी) बनने की ज़रूरत बताती है। PLISFPI-अप्रूव्ड कंपनियों के एक्सपोर्ट में 2019-20 के बाद से 13.23% की सालाना ग्रोथ रेट दर्ज की गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और स्कीम में चुनौतियां

सरकारी पहलों के बावजूद, कुछ बड़ी स्ट्रक्चरल दिक्कतें बनी हुई हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर कोल्ड स्टोरेज (शीतगृह) की कमी के कारण post-harvest losses (कटाई के बाद की बर्बादी) बहुत ज़्यादा होती है, जो अनुमानित 30% से ज़्यादा है। कुछ कंपनियों को PLI स्कीम के तहत सब्सिडी (सब्सिडी) मिलने में दिक्कतें आई हैं, क्योंकि वे इन्वेस्टमेंट थ्रेशोल्ड (निवेश की सीमा) या निर्धारित ग्रोथ टारगेट को पूरा नहीं कर पाईं। इससे पता चलता है कि स्कीम के फायदे सभी के लिए एक समान सुलभ नहीं हैं।

किसानों के लिए उचित मूल्य और आय सुनिश्चित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि ITC, Britannia और Nestle जैसी बड़ी कंपनियां अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करके आगे बढ़ रही हैं, लेकिन छोटे प्लेयर्स और को-ऑपरेटिव्स को नई कैपेसिटी का पूरा फायदा उठाने में मदद करना एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

भविष्य का ग्रोथ आउटलुक

भारतीय फूड प्रोसेसिंग सेक्टर लगातार ग्रोथ के लिए तैयार है। अनुमान है कि 2032 तक यह $735.5 बिलियन तक पहुंच सकता है। इस विस्तार में बढ़ती डोमेस्टिक कंजम्पशन (घरेलू मांग), शहरीकरण, बढ़ती आय और बढ़ते एक्सपोर्ट मार्केट के साथ-साथ PLISFPI और PMKSY जैसी स्कीमों का लगातार सपोर्ट शामिल होगा। ऑर्गेनिक फूड्स और प्लांट-बेस्ड डाइट्स (पौधे-आधारित आहार) की बढ़ती मांग, AI और स्मार्ट पैकेजिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन भी सेक्टर के भविष्य को प्रभावित करेगा। यूनियन बजट 2025-26 में PMKSY और PLISFPI जैसी सेंट्रल सेक्टर स्कीम्स के लिए आवंटन, इस महत्वपूर्ण इंडस्ट्री के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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