रिकॉर्ड ऊंचाई के बावजूद मार्च में दिखी बड़ी कमजोरी
फाइनेंशियल ईयर 2026 (जो मार्च 2026 में समाप्त हुआ) के लिए भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने $122.43 बिलियन का अब तक का उच्चतम स्तर हासिल किया, जो पिछले साल की तुलना में 4.86% की वृद्धि दर्शाता है। लेकिन, यह शानदार सालाना आंकड़ा मार्च 2026 के एक बड़े आर्थिक झटके को छिपा रहा था। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने प्रमुख व्यापार मार्गों को बाधित कर दिया, जिससे पारंपरिक बाजारों में निर्यात में तेज गिरावट आई और अमेरिका पर सेक्टर की निर्भरता बढ़ गई, भले ही वहां महत्वपूर्ण टैरिफ (tariffs) लागू हों।
पश्चिम एशिया संकट का असर
संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जो भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, में निर्यात 66.8% गिरकर $237.4 मिलियन रह गया। सऊदी अरब में भी निर्यात 45% घटकर $247.7 मिलियन हो गया। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में मार्च में निर्यात 50.7% की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका (US) भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा, जहां FY26 में 50% तक के टैरिफ के बावजूद शिपमेंट 2.3% बढ़कर $19.60 बिलियन हो गया। उत्तरी अमेरिका में 1.9% की वृद्धि हुई और यूरोपीय संघ (EU) में 8.6% की बढ़ोतरी देखी गई।
शिपिंग में बाधाएं और बढ़ती चिंताएं
पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय संघर्षों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास व्यवधानों से उत्पन्न संकट ने वैश्विक शिपिंग को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे यात्रा का समय बढ़ गया है और माल ढुलाई की लागत (freight costs) भी ऊंची हो गई है। यूरोप को होने वाले करीब 80% निर्यात के लिए लाल सागर (Red Sea) गलियारे पर भारत की निर्भरता को देखते हुए, निर्यात मार्गों को काफी लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन बाधाओं ने थोक मूल्य मुद्रास्फीति (wholesale price inflation) को भी बढ़ाया है, जो मार्च 2026 में तीन साल के उच्च स्तर 3.88% पर पहुंच गई, जिसका मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं।
FY26 में ग्रोथ की अगुवाई ऑटोमोबाइल, तांबा, लोहा और इस्पात, और इलेक्ट्रिक मशीनरी जैसे उत्पादों ने की। हालांकि, विमान, अंतरिक्ष यान और वैज्ञानिक उपकरणों के निर्यात में गिरावट आई। यह मांग में विभाजन और उच्च-मूल्य वाले सामानों की आपूर्ति में संभावित मुद्दों को दर्शाता है।
भविष्य की ओर एक नजर
EEPC इंडिया (EEPC India) के अध्यक्ष पंकज चड्ढा (Pankaj Chadha) ने सेक्टर की अनुकूलन क्षमता (adaptability) और नए अवसरों की तलाश पर जोर दिया। उन्होंने बाजार और उत्पाद विविधीकरण (diversification) की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
FY27 की ओर देखते हुए, EEPC इंडिया (EEPC India) सतर्क आशावाद (cautious optimism) बनाए हुए है। निरंतर विकास के लिए सेक्टर के लचीलेपन, बाजारों के विविधीकरण के आक्रामक प्रयासों और सरकारी नीतियों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा। उद्योग को उम्मीद है कि कम होते भू-राजनीतिक तनाव निर्यात वृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि, जारी मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताएं एक संतुलित दृष्टिकोण का संकेत देती हैं, जो भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अनुकूलन क्षमता को महत्वपूर्ण बनाती हैं। 2030 तक इंजीनियरिंग निर्यात में $250 बिलियन तक पहुंचने का दीर्घकालिक लक्ष्य एक प्रमुख उद्देश्य बना हुआ है।
