घरेलू उत्पादन में बड़ी छलांग की तैयारी
मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) की रिपोर्ट 'वायर्ड फॉर ग्रोथ: इंडियाज इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट अपॉर्च्युनिटी' (Wired for Growth: India's Electrical Equipment Opportunity) का अनुमान है कि भारत का घरेलू इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट उत्पादन काफी बढ़ने वाला है। 2025 में अनुमानित $50 अरब डॉलर से यह 2035 तक $195 अरब डॉलर से $235 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकता है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि इसी अवधि में घरेलू खपत $170 अरब डॉलर से $205 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, और निर्यात $60 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।
ग्रोथ के पीछे मुख्य कारण
2035 तक सालाना 11-13% की अनुमानित ग्रोथ रेट कई कारणों से प्रेरित है। इनमें राष्ट्रीय विद्युतीकरण (National Electrification) में वृद्धि, रिन्यूएबल एनर्जी की ओर तेज़ बदलाव, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग और मजबूत निर्यात की संभावनाएं शामिल हैं। मैकिन्से ने आईटी सर्विसेज (IT Services) और ऑटो कंपोनेंट्स (Auto Components) जैसे क्षेत्रों में भारत की पिछली सफलता का हवाला देते हुए इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में इसकी क्षमता की ओर इशारा किया है।
बढ़ती इंपोर्ट निर्भरता से निपटना
हालांकि घरेलू खपत FY2025 में बढ़कर $59 अरब डॉलर हो गई है, रिपोर्ट बढ़ती इंपोर्ट निर्भरता की ओर इशारा करती है, जिसके 2020 में 22% से बढ़कर 2025 में 33% होने की उम्मीद है। मैकिन्से चेतावनी देता है कि अगर कदम नहीं उठाए गए, तो 2035 तक इंपोर्ट 70% से अधिक हो सकता है, जिससे $130 अरब डॉलर से अधिक का प्रोडक्शन शॉर्टफॉल हो सकता है। इससे निपटने के लिए, रिपोर्ट पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, एयर-कंडीशनर कंप्रेसर, सोलर फोटोवोल्टिक सेल और मॉड्यूल, ट्रांसफार्मर और केबल जैसी प्रमुख वस्तुओं के घरेलू निर्माण में पांच गुना विस्तार की सिफारिश करती है।
रणनीतिक लोकलाइजेशन की संभावना
मैकिन्से ने पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, सोलर पीवी (Solar PV) और विभिन्न सब-कंपोनेंट्स जैसे सेगमेंट को लोकलाइजेशन (Localization) के लिए प्रमुख अवसर के रूप में पहचाना है, जो इंपोर्ट पर निर्भरता को काफी कम कर सकता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि आक्रामक लोकलाइजेशन 2035 तक कुल इंपोर्ट निर्भरता को 14% से कम कर सकता है। मैकिन्से के पार्टनर और सह-लेखक भावेश मित्तल ने कहा कि वर्तमान तरीके अपर्याप्त हैं और घरेलू क्षमता में पर्याप्त वृद्धि आवश्यक है।
भविष्य के ग्रोथ अवसर
उभरते क्षेत्रों में रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण, सबसी (Subsea) और हाई-स्पीड रेल जैसे विशेष अनुप्रयोगों के लिए हाई-एंड केबल, ग्रिड स्टेबिलाइजेशन टेक्नोलॉजी (Grid Stabilization Technology) और पावर सॉफ्टवेयर शामिल हैं। अकेले रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण और हाई-एंड केबल बाजार 2035 तक $350-$400 अरब डॉलर का वैश्विक अवसर प्रस्तुत कर सकता है। रिपोर्ट नीति निर्माताओं, उद्योग के खिलाड़ियों और निवेशकों के बीच सहयोग की वकालत करती है ताकि लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, तकनीकी क्षमताओं, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और निर्यात बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा सके, जिसका लक्ष्य भारत को इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट के लिए एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है।
