पिछले फिस्कल ईयर में **2%** की गिरावट झेलने के बाद अब भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी और शानदार एक्सपोर्ट के दम पर इंडस्ट्री ने FY27 के लिए **9-12%** ग्रोथ का लक्ष्य तय किया है।
भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर एक बार फिर उम्मीदों की राह पर है। फिस्कल ईयर 2025-26 काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिसमें कुल सेल्स 2% घटकर 1,36,995 यूनिट्स पर आ गई थी। लेकिन अब सितंबर 2026 में हुई ICEMA की एनुअल बैठक में इंडस्ट्री लीडर्स ने FY27 के लिए घरेलू सेल्स ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 9-12% कर दिया है।
रिकवरी और इंफ्रा की रफ्तार
सेक्टर में इस नए उत्साह के पीछे पिछले तीन महीनों में प्रोजेक्ट्स की तेजी से हो रही शुरुआत है। सरकार का ₹12.2 लाख करोड़ का बजट एलोकेशन अब जमीन पर मांग पैदा कर रहा है। इसके अलावा, एक्सपोर्ट ने एक बड़े सपोर्ट का काम किया है, जिसमें FY26 के दौरान 32% की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई थी।
चुनौतियां और इंपोर्ट पर निर्भरता
उम्मीदें तो बेहतर हैं, लेकिन निवेशकों को कुछ अहम बातों पर नजर रखनी चाहिए। इंडस्ट्री अभी भी इंपोर्टेड कंपोनेंट्स पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जिसका सालाना बिल करीब ₹45,000 करोड़ है। इसे कम करने के लिए Volvo Construction Equipment जैसी कंपनियां भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग और R&D पर जोर दे रही हैं।
इसके अलावा, स्टील और बिटुमेन की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रोजेक्ट्स की लागत को प्रभावित कर रहा है। साथ ही, CEV Stage V जैसे कड़े एमिशन नॉर्म्स के कारण मशीनों की खरीद लागत (Procurement cost) बढ़ गई है, जिससे ठेकेदारों पर दबाव बना हुआ है।
रिस्क और भविष्य की दिशा
ग्रोथ की रफ्तार पूरी तरह प्रोजेक्ट्स की टाइमिंग और फंडिंग पर टिकी है। हाई-स्पीड रेल और फ्रेट कॉरिडोर जैसे बड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के बावजूद, काम में देरी एक बड़ी बाधा है। भविष्य में वही कंपनियां मुनाफे में रहेंगी जो सप्लाई चेन को बेहतर मैनेज करेंगी और लोकल प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर फोकस करेंगी।
