केंद्र सरकार का 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' भारत को दुनिया का चिप बनाने का एक बड़ा केंद्र बनाने का लक्ष्य रखता है। इसके लिए ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का आवंटन किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना से न सिर्फ चिप बनाने वाली कंपनियां, बल्कि उनसे जुड़ी सहायक (ancillary) इंडस्ट्रीज को भी बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट $100-$110 बिलियन तक पहुंच जाएगा। ऐसे में, Navin Fluorine International, SRF, KEI Industries, और L&T Technology Services जैसी कंपनियां इस मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार दिख रही हैं।
केमिकल सेक्टर में Navin Fluorine और SRF:
Navin Fluorine International, जो स्पेशियलिटी केमिकल बनाती है, ने Q3 FY26 में शानदार नतीजे पेश किए। कंपनी का रेवेन्यू 47% बढ़कर ₹892 करोड़ और नेट प्रॉफिट 122% उछलकर ₹185 करोड़ रहा। कंपनी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक केमिकल्स के क्षेत्र में भी मौके तलाश रही है। लेकिन, कंपनी का रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 11.7% है, जो इसके हाई ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ्स (TTM) P/E रेशियो (लगभग 74.5x) और ₹32,000 करोड़ के मार्केट कैप की तुलना में सामान्य लगता है।
वहीं, SRF के नेट प्रॉफिट में भी इसी तिमाही में 60% की बढ़त के साथ ₹433 करोड़ का मुनाफा दर्ज हुआ, जिसका मुख्य कारण इसका केमिकल्स बिजनेस रहा। SRF का मार्केट कैप करीब ₹81,000 करोड़ है, TTM P/E लगभग 47.5x और ROCE 12.3% है। दोनों कंपनियां हाई-प्योरिटी केमिकल्स की बढ़ती मांग का लाभ उठा सकती हैं, लेकिन इन्हें कीमतों के उतार-चढ़ाव और कड़े ग्लोबल कंपटीशन का सामना करना पड़ रहा है। Gujarat Fluorochemicals Limited इस सेगमेंट में एक अहम प्रतिस्पर्धी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग में KEI Industries और L&T Technology Services:
वायर और केबल बनाने वाली कंपनी KEI Industries ने FY26 के पहले नौ महीनों में 21% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जो इसके नए Sanand प्लांट की क्षमता विस्तार के कारण संभव हुआ। ₹43,000 करोड़ के मार्केट कैप, 51.1x TTM P/E और 21.3% ROCE वाली KEI, सेमीकंडक्टर फैब्स की पावर-intensive जरूरतों को पूरा करने में अच्छी स्थिति में है। हालांकि, इसकी प्रॉफिटेबिलिटी तांबे (copper) और एल्यूमीनियम (aluminum) जैसी कमोडिटीज की कीमतों पर निर्भर करती है।
दूसरी ओर, इंजीनियरिंग सर्विसेज प्रोवाइडर L&T Technology Services (LTTS) ने Q3 FY26 में 10.2% रेवेन्यू ग्रोथ बताई, जो बड़े डील जीतने के कारण हुई। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹37,000 करोड़, TTM P/E 29.7x और ROCE 28.3% है। मजबूत रिटर्न के बावजूद, LTTS को IT सेक्टर में मंदी और मार्जिन पर दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वायर और केबल सेक्टर में Polycab India और RR Kabel, जबकि ER&D सेक्टर में Cyient और Tata Consultancy Services जैसी कंपनियां मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं।
वैल्यूएशन की पहेली और जोखिम:
इन कंपनियों के शेयर फिलहाल काफी महंगे (stretched valuations) नजर आ रहे हैं, जो सेमीकंडक्टर के अवसर को लेकर भारी उम्मीदों को दर्शाते हैं। Navin Fluorine का P/E रेशियो करीब 74.5x और SRF का 47.5x है, जो उनके इंडस्ट्री एवरेज से काफी ऊपर है, भले ही ROCE औसत हो। KEI Industries और LTTS, जिनका P/E रेशियो क्रमशः करीब 51.1x और 29.7x है, वे भी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। SRF ने फरवरी 2025 में एक बड़ी तेजी दिखाई थी, और Navin Fluorine पिछले साल 51.9% चढ़ा है, जिसका मतलब है कि इनमें से कई गेन्स पहले ही डिस्काउंट हो चुके हैं।
इसके अलावा, ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड टेंशन और इंपोर्ट रिस्ट्रिक्शन्स जैसी दिक्कतों से जूझ रही है, जो भारत के एक्सपोर्ट-लेड ग्रोथ पर असर डाल सकती हैं। Navin Fluorine और SRF को कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और चीन जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे मार्जिन पर दबाव आ सकता है। KEI Industries की प्रॉफिटेबिलिटी तांबा और एल्यूमीनियम की कीमतों से जुड़ी है। LTTS को ग्लोबल टेक्नोलॉजी खर्च में मंदी और मार्जिन पर पड़े असर से निपटना होगा। विश्लेषकों (Analysts) की राय भी मिली-जुली है, कुछ का मानना है कि मौजूदा स्तरों से अपसाइड सीमित है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर भी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की ऊंची लागत और इंपोर्ट पर निर्भरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
आगे का रास्ता:
मैनेजमेंट भविष्य में क्षमता विस्तार और नए अवसरों पर निवेश जारी रखने की बात कह रहा है। Navin Fluorine इलेक्ट्रॉनिक केमिकल्स और SRF नेक्स्ट-जेनरेशन रेफ्रिजरेंट्स पर ध्यान दे रही हैं। KEI Industries अपने एक्स्ट्रा-हाई वोल्टेज केबल बिजनेस का विस्तार कर रही है, और LTTS धीरे-धीरे मार्जिन सुधारने का लक्ष्य रख रही है। हालांकि, ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल, ट्रेड डायनामिक्स में बदलाव और घरेलू औद्योगिक विकास की गति इन कंपनियों के भविष्य को काफी हद तक प्रभावित करेगी। LTTS पर विश्लेषकों की राय बंटी हुई है, जो नियर-टर्म ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता दर्शाती है।