Union Budget 2026: भारत बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब! बजट में इस सेक्टर को मिला 'महा-बूस्ट'

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Union Budget 2026: भारत बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब! बजट में इस सेक्टर को मिला 'महा-बूस्ट'
Overview

Union Budget 2026-27 ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस बजट में सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को बढ़ाकर **₹12.2 लाख करोड़** करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख सेक्टरों के लिए खास पॉलिसी और फाइनेंशियल रिफॉर्म्स की घोषणा की गई है।

सरकार का यह ₹12.2 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) का ऐलान, पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹11.21 लाख करोड़ से एक बड़ी छलांग है। यह कदम इंडस्ट्रियल पॉलिसी को एक मज़बूत दिशा देने और अनिश्चितता भरे ग्लोबल माहौल में सस्टेंड ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिल रहा बड़ा बूस्ट

बजट 2026-27 का मुख्य एजेंडा डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करना है। ₹12.2 लाख करोड़ के बढ़े हुए कैपेक्स का लक्ष्य मैन्युफैक्चरिंग के लिए ऐसा माहौल तैयार करना है जहाँ इंडस्ट्रीज़ विश्वास के साथ काम कर सकें। सरकार की रणनीति सिर्फ कुछ खास इंसेंटिव्स (incentives) देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सम्पूर्ण इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम (industrial ecosystem) बनाने पर ज़ोर दे रही है। इसमें ज़रूरी इनपुट्स (inputs), बेहतर लॉजिस्टिक्स (logistics), स्किल्ड वर्कर्स (skilled workers) और आसान फाइनेंसिंग (financing) जैसे अहम पहलू शामिल हैं।

खास सेक्टरों के लिए नई योजनाएं

खास सेक्टर्स को ध्यान में रखते हुए, बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। बायो-फार्मा सेक्टर के लिए 'बायो-फार्मा SHAKTI' (Biopharma SHAKTI) नाम की एक नई पहल शुरू की गई है, जिसके तहत अगले 5 सालों में ₹10,000 करोड़ का फंड दिया जाएगा। इसका मकसद बायोलॉजिक्स (biologics) और बायोसिमिलर (biosimilars) में देश की क्षमता को बढ़ाना है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) को अपग्रेड करके ISM 2.0 लाया गया है। इसका दायरा सिर्फ फैब्रिकेशन (fabrication) और असेंबली (assembly) तक सीमित न रहकर इक्विपमेंट (equipment), मटेरियल (materials) और डिजाइन (design) तक बढ़ाया गया है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (Electronics Component Manufacturing Scheme) के लिए आवंटित राशि (corpus) को भी काफी बढ़ाया गया है, ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़े और इंपोर्ट पर हमारी निर्भरता कम हो।

एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर

एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग (advanced manufacturing) की नींव को मज़बूत करने के लिए, बजट में हाई-टेक टूल रूम्स (hi-tech tool rooms) और कंस्ट्रक्शन व इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट (construction and infrastructure equipment) के लिए एक नई स्कीम लाने का भी ज़िक्र है। इससे कैपिटल गुड्स (capital goods) सेक्टर को सहारा मिलेगा, जो ऑटोमोटिव (automotive) और हैवी इंजीनियरिंग (heavy engineering) जैसे उद्योगों के लिए ज़रूरी है। लॉजिस्टिक्स को और बेहतर बनाने के लिए कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग (container manufacturing) पर भी ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, फ्रेट कॉरिडोर (freight corridors), वॉटरवेज़ (waterways) और कोस्टल शिपिंग (coastal shipping) जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देकर लॉजिस्टिक्स कॉस्ट (logistics cost) को कम करने का लक्ष्य है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कंस्ट्रक्शन-फेज़ के रिस्क (construction-phase risk) को कम करने का एक फ्रेमवर्क भी पेश किया गया है।

टेक्सटाइल आधुनिकीकरण और फाइनेंशियल आर्किटेक्चर

सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाले टेक्सटाइल (textile) सेक्टर को भी आधुनिक बनाने पर ज़ोर दिया गया है, जिसमें फाइबर्स (fibres), क्लस्टर मॉडर्नाइजेशन (cluster modernization), सस्टेनेबिलिटी (sustainability) और स्किलिंग (skilling) जैसे सभी पहलू शामिल हैं। इसका मकसद इस सेक्टर को ग्लोबल लेवल पर और कॉम्पिटिटिव (competitive) बनाना है। छोटे शहरों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स (industrial clusters) को भी अपग्रेड किया जाएगा, ताकि वे राष्ट्रीय और एक्सपोर्ट मार्केट्स (export markets) से बेहतर ढंग से जुड़ सकें। प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के साथ-साथ, वर्किंग कैपिटल (working capital) की कमी को दूर करने के लिए फाइनेंशियल आर्किटेक्चर (financial architecture) को भी मज़बूत किया जा रहा है। ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (Trade Receivables Discounting System - TReDS) में रिफॉर्म्स (reforms) और क्रेडिट गारंटी (credit guarantees) के ज़रिए छोटे मैन्युफैक्चरर्स के लिए कैश साइकल्स (cash cycles) और लिक्विडिटी (liquidity) को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे टेक्नोलॉजी में आसानी से निवेश कर सकें।

ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस और भविष्य की राह

भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन (structural transformation) से गुज़र रहा है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में, जो तेज़ी से एक्सपोर्ट (export) कैटेगरी बनता जा रहा है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (Global Innovation Index) में भी भारत की रैंकिंग सुधरी है, जो टेक्नोलॉजिकल रेडीनेस (technological readiness) में प्रगति को दर्शाता है। हालांकि, इनोवेशन को बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन में बदलना अभी भी एक चुनौती है। दुनिया भर में ट्रेड पॉलिसी (trade policy) में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) जैसे माहौल में, एक मज़बूत डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाना भारत के लिए एक स्ट्रेटेजिक ज़रूरत बन गया है। एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में भारत छठे स्थान पर है, लेकिन इस बजट के ज़रिए सरकार ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (ease of doing business) को बेहतर बनाकर और एक मज़बूत इकोसिस्टम बनाकर अपनी ग्लोबल पोजीशन सुधारने की कोशिश कर रही है।

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