India Manufacturing PMI: सेक्टर में रफ्तार बढ़ी, पर महंगाई का डबल अटैक!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Manufacturing PMI: सेक्टर में रफ्तार बढ़ी, पर महंगाई का डबल अटैक!
Overview

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए अप्रैल का महीना मिला-जुला रहा। अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर **54.7** हो गया, जो कि सेक्टर में विस्तार (expansion) को दिखाता है। हालांकि, यह पिछले लगभग चार सालों में दूसरी सबसे धीमी ग्रोथ है।

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महंगाई का दबाव और धीमी ग्रोथ

इस धीमी रफ्तार की एक बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट में बढ़ती महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव है। खासकर, मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्षों का असर कमोडिटी (Commodity) कीमतों पर साफ दिख रहा है। इसके चलते, भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को अगस्त 2022 के बाद से इनपुट कॉस्ट (Input Costs) में सबसे तेज बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। एल्युमिनियम, केमिकल्स और फ्यूल जैसे कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं। नतीजतन, आउटपुट प्राइस (Output Prices) यानी तैयार माल की कीमतें भी पिछले छह महीनों में सबसे तेजी से बढ़ी हैं।

डिमांड में नरमी, पर एक्सपोर्ट में तेजी

हालांकि, उत्पादन (Production) और नए ऑर्डर्स (New Orders) में बढ़ोतरी की रफ्तार भी जून 2022 के बाद से दूसरी सबसे धीमी रही। इसकी वजह कॉम्पिटिशन, भू-राजनीतिक तनाव और ग्राहकों द्वारा अप्रूवल में देरी बताई जा रही है। इसके बावजूद, एक्सपोर्ट ऑर्डर्स (Export Orders) में पिछले सात महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

रोजगार बढ़ा, पर इन्वेंट्री पर पैनी नजर

इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने रोजगार (Employment) के अवसर 10 महीने के उच्चतम स्तर पर बढ़ाए हैं, क्योंकि कंपनियां भविष्य की डिमांड को लेकर आशावादी हैं। वहीं, कंपनियां सतर्कता बरत रही हैं और इन्वेंट्री (Inventories) को कम रखा है। इन्वेंट्री ग्रोथ पिछले लगभग पांच सालों में सबसे धीमी रही है। यह सुस्त बिक्री की उम्मीदों और बढ़ती कीमतों के बीच वर्किंग कैपिटल को मैनेज करने की जरूरत को दर्शाता है।

वैश्विक तस्वीर और इकोनॉमिस्ट की राय

अगर दुनिया भर के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बात करें तो अप्रैल में चीन का PMI 50.3 पर स्थिर रहा, जो मार्च से थोड़ा कम है। वहीं, जापान के मैन्युफैक्चरिंग PMI में अच्छी उछाल देखी गई और यह 55.1 पर पहुंच गया, जो जनवरी 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। मार्च में वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग PMI 51.3 रहा।

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट, प्रांजुल भंडारी ने कहा कि सेक्टर चुनौतियों के बावजूद लचीला बना हुआ है। हालांकि, मध्य पूर्व के संघर्षों से प्रेरित महंगाई एक बड़ी चिंता का विषय है, जो इकोनॉमिक आउटलुक को प्रभावित कर सकती है। उम्मीद है कि कंपनियां लागत नियंत्रण और इन्वेंट्री मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित करती रहेंगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.