डिफेंस की नई जंग: AMCA प्रोजेक्ट के लिए नई ताकतें
DRDO ने भारत के ड्रीम प्रोजेक्ट, फिफ्थ-जनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) के प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए अपनी शॉर्टलिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में तीन अलग-अलग ग्रुप्स को चुना गया है, जो इस एडवांस फाइटर जेट को डिजाइन और डेवलप करने की दौड़ में शामिल होंगे। यह भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जो आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक अहम पड़ाव है।
कौन-कौन हैं रेस में?
लिस्ट में सबसे पहले है Tata Advanced Systems Ltd (TASL), जो इस प्रोजेक्ट पर अकेले काम करेगी। दूसरा ग्रुप Larsen & Toubro (L&T) और Bharat Electronics Ltd (BEL) का एक मजबूत कंसोर्टियम है। L&T, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹5.78 लाख करोड़ है और ऑर्डर बुक ₹5.79 लाख करोड़ की है, अपनी इंजीनियरिंग क्षमता लाएगी, जबकि BEL डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में अपनी विशेषज्ञता के साथ जुड़ेगी। तीसरा कंसोर्टियम Bharat Forge, BEML Ltd और Data Patterns को मिलाकर बना है। Bharat Forge, जिसका ऑर्डर बुक करीब ₹9,500 करोड़ है, भारी इंजीनियरिंग की जिम्मेदारी संभालेगी, वहीं Data Patterns एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और एवियोनिक्स के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएगी। Data Patterns का मार्केट कैप लगभग ₹15,834 करोड़ और P/E रेश्यो 62 के आसपास है। BEML का मार्केट कैप लगभग ₹14,458 करोड़ है।
HAL का क्या हुआ? परंपरागत प्लेयर बाहर
इस दौड़ में एक बड़ा उलटफेर यह है कि सरकारी कंपनी Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया है। HAL, जिसने LCA Tejas जैसे फाइटर जेट्स बनाए हैं, कागजी प्रक्रिया में हुई एक चूक के कारण इस महत्वपूर्ण चरण से बाहर हो गई। HAL का मार्केट कैप लगभग ₹2.82 लाख करोड़ है। DRDO का यह फैसला डिफेंस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और नई कंपनियों को मौका देने की ओर इशारा करता है।
प्रोजेक्ट का बजट और लक्ष्य
AMCA प्रोजेक्ट के प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए सरकार ने लगभग ₹15,000 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इस प्रोजेक्ट का अंतिम लक्ष्य 2035 तक इस फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट को भारतीय वायुसेना में शामिल करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत 125 से ज्यादा ऐसे फाइटर जेट्स बनाए जाने की उम्मीद है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत डिफेंस पावर के रूप में स्थापित करेगा।
आगे की राह और चुनौतियाँ
फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट का डेवलपमेंट एक बेहद जटिल और लंबा प्रोसेस है। इसमें देरी और लागत बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। हालांकि, इन तीन कंसोर्टियम्स के चुनाव से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उम्मीद है कि इससे नवाचार (innovation) को भी बढ़ावा मिलेगा। एक बड़ी चुनौती इंजन तकनीक को लेकर है, जिसमें अभी भी विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बनी हुई है। DRDO का यह कदम भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी जीत साबित हो सकता है, बशर्ते इसे सही ढंग से लागू किया जाए।