भारत का स्टील सेक्टर अपने पीक कंस्ट्रक्शन सीजन (अक्टूबर-मार्च) में प्रवेश कर चुका है। रीबार (Rebar) की कीमतें जुलाई के निचले स्तर से सुधरकर अब **₹57,300** प्रति टन पर पहुंच गई हैं।
मानसून की विदाई के साथ ही भारत का स्टील सेक्टर एक नई तेजी की ओर बढ़ रहा है। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों के लिए सबसे व्यस्त माना जाता है, जिससे स्टील कंपनियों को बड़ी उम्मीदें हैं।
कीमतों में आया सुधार
मार्केट आंकड़ों के मुताबिक, रीबार की कीमतें अब ₹57,300 प्रति टन पर हैं, जो जुलाई के ₹48,000 के निचले स्तर से एक बड़ी रिकवरी है। वहीं, हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतें भी ₹64,000 प्रति टन के आसपास स्थिर हो गई हैं। Tata Steel, JSW Steel और Jindal Steel जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह रिकवरी प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने के लिए बेहद अहम है।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
कीमतों में उछाल के बावजूद, कोकिंग कोल (Coking Coal) की अस्थिर कीमतें कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं। खासकर वे कंपनियां जो पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस का उपयोग करती हैं, उन्हें लागत प्रबंधन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में स्टील की अतिरिक्त सप्लाई के कारण सस्ते इम्पोर्ट का खतरा बना हुआ है। यदि विदेशी स्टील सस्ता रहता है, तो घरेलू कंपनियों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी करना मुश्किल हो सकता है। Steel Authority of India जैसी कंपनियों के लिए बाजार की इस अस्थिरता के दौरान अपने मार्जिन को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होगी।
आने वाले महीनों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार और रॉ-मटीरियल की कीमतों में नियंत्रण ही इस सेक्टर की दिशा तय करेगा।
