भारतीय स्टील कंपनियों के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही उम्मीदों से भरी है। जुलाई के निचले स्तरों से रीबार (Rebar) की कीमतों में **13-14%** का सुधार देखा गया है, जो सेक्टर को मजबूती दे रहा है।
भारतीय स्टील सेक्टर फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही में बेहतर प्रदर्शन के लिए कमर कस रहा है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सुस्ती की चिंताओं के बावजूद घरेलू मांग में लगातार लचीलापन बना हुआ है। इस सकारात्मकता के पीछे मुख्य कारण रीबार की कीमतों में आया 13-14% का उछाल है, जो कंपनियों को मार्जिन के दबाव से निपटने में मदद कर रहा है।
प्रमुख खिलाड़ियों की रणनीति
दिग्गज कंपनियां अलग-अलग रास्तों पर चल रही हैं। Steel Authority of India Ltd (SAIL) का पूरा ध्यान अब कॉस्ट एफिशिएंसी पर है, जिससे वह अपने खर्चों को कम कर सके। वहीं, Tata Steel अपनी ग्लोबल ट्रांसफॉर्मेशन और घरेलू स्तर पर हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है। दूसरी ओर, JSW Steel ने JFE Steel के साथ पार्टनरशिप के जरिए अपनी ग्रोथ को गति दी है, जिसके तहत कंपनी ₹22,000 करोड़ से ₹24,000 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर करने वाली है। इस फाइनेंशियल ईयर में घरेलू मांग में 7-9% की ग्रोथ की उम्मीद है।
चुनौतियां और मार्केट रिस्क
मांग का आउटलुक बेहतर होने के बावजूद सेक्टर के सामने इंपोर्ट का खतरा बरकरार है। चीन, जापान और रूस से आने वाले स्टील की मात्रा में पहली तिमाही के दौरान 22% की बढ़ोतरी देखी गई है, जो घरेलू कीमतों पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, कोकिंग कोल की अस्थिर कीमतें और ग्लोबल कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने रहेंगे। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होनी चाहिए कि क्या रीबार की कीमतों में आई यह रिकवरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की मांग के दम पर बनी रहती है।
