भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में प्राइवेट इक्विटी (Private Equity) और बड़े निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। साल 2026 में इन कंपनियों ने रिकॉर्ड $460 मिलियन यानी करीब ₹3,800 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। यह पैसा सोलर सेल, वेफर और इंगट (Ingot) जैसे अहम कंपोनेंट्स के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देगा, जिसमें सरकारी स्कीम्स जैसे PLI और ALMM का बड़ा हाथ है।
क्यों बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी?
साल 2026 में भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने इक्विटी कैपिटल (Equity Capital) के तौर पर करीब $460 मिलियन जुटाए हैं। यह एक बड़ा उछाल है, क्योंकि 2025 में यह आंकड़ा $322.5 मिलियन और 2021 में महज़ $29.3 मिलियन था। हालिया कुछ बड़े डील्स में Goldi Solar ने ₹1,422 करोड़ Havells के नेतृत्व वाले निवेशकों से जुटाए। इसी तरह, GREW Solar ने Bay Capital Investment Ltd से ₹1,050 करोड़ और ReNew Photovoltaics ने British International Investment से $100 मिलियन हासिल किए हैं।
सिर्फ मॉड्यूल नहीं, अब सेल, वेफर और इंगट भी
निवेश का नेचर (Nature) बदला है। अब कंपनियां सिर्फ सोलर मॉड्यूल बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सेल, वेफर और इंगट जैसी ज़रूरी चीजों के इंटीग्रेटेड (Integrated) प्रोडक्शन पर फोकस कर रही हैं। यह भारत के लिए एक आत्मनिर्भर सप्लाई चेन (Supply Chain) बनाने की दिशा में अहम कदम है। पहले भारतीय सोलर सेक्टर को सस्ते इम्पोर्ट (Import) की मार, कम प्रॉफिट मार्जिन और कैपिटल जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) जैसी स्कीम्स ने तस्वीर बदल दी है।
सरकारी पॉलिसी और डिमांड का असर
PM कुसुम और PM Surya Ghar जैसी सरकारी योजनाओं से डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) मजबूत हुई है, जिससे मैन्युफैक्चरर्स के लिए रेवेन्यू (Revenue) का आउटलुक (Outlook) बेहतर हुआ है। इन पॉलिसीज़ ने लोकल कंपोनेंट्स के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है, जिससे सेक्टर का स्ट्रक्चर (Structure) बदल रहा है और कंपनियां हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं। ऐसे में, निवेशक अब उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स (Capital-intensive projects) को समय पर पूरा कर सकें और पॉलीसिलिकॉन (Polysilicon) जैसे रॉ मैटेरियल (Raw Material) के ग्लोबल प्राइस (Global price) में उतार-चढ़ाव को संभाल सकें।
निवेशकों को किन बातों पर रखना होगा ध्यान?
पूंजी का यह प्रवाह विस्तार (Expansion) के लिए ज़रूरी है, लेकिन सेक्टर अभी भी कुछ फैक्टरों के प्रति संवेदनशील है। इन निवेशों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मैन्युफैक्चरर्स बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर कैसे पूरा करते हैं और नए प्लांट्स बनाते समय कर्ज (Debt) का स्तर कैसे मैनेज करते हैं। इसके अलावा, जैसे-जैसे कैपेसिटी (Capacity) बढ़ेगी, कॉम्पिटिटिव प्रॉफिट मार्जिन (Competitive profit margin) बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। सरकारी नियम और ग्लोबल ट्रेड पॉलिसीज़ (Global trade policies) भी रॉ मैटेरियल की लागत को प्रभावित करती रहेंगी। निवेशक ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational efficiency) में प्रगति पर भी नज़र रखेंगे।
