Indian Road Builders: हाईवे प्रोजेक्ट्स में सुस्ती से सड़क निर्माण कंपनियां अब नए सेक्टर में लगा रहीं दांव

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Road Builders: हाईवे प्रोजेक्ट्स में सुस्ती से सड़क निर्माण कंपनियां अब नए सेक्टर में लगा रहीं दांव

National Highways Authority of India (NHAI) द्वारा प्रोजेक्ट्स आवंटन 7 साल के निचले स्तर पर आने के बाद, दिग्गज रोड कंस्ट्रक्शन कंपनियां अब पानी, रेलवे और पावर सेक्टर की ओर रुख कर रही हैं।

हाईवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर लगा ब्रेक

भारतीय सड़क निर्माण क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, NHAI ने केवल 3,124 किलोमीटर के रोड प्रोजेक्ट्स ही आवंटित किए हैं, जो पिछले 7 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। सरकार का मुख्य ध्यान अब कर्ज कम करने और काम की क्वालिटी सुधारने पर है, जिसके चलते बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों को अपना कारोबार बचाने के लिए पानी की सप्लाई, पावर ट्रांसमिशन, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे जैसे क्षेत्रों में कदम रखना पड़ रहा है।

मार्जिन पर दवाब की चुनौती

इन नए क्षेत्रों में काम तो मिल रहा है, लेकिन इसकी कीमत कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ रही है। जानकारों के मुताबिक, ऑपरेटिंग मार्जिन 10% से 11% के दायरे में सिमट सकता है। इसकी मुख्य वजह है इन नए सेक्टर्स में गलाकाट प्रतिस्पर्धा और कंपनियों का इन क्षेत्रों के लिए नया होना। पुरानी राह से हटकर नए रेगुलेटरी माहौल में ढलना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है।

बढ़ रही है कैपिटल की जरूरत

इन्वेस्टर्स को यह भी समझना होगा कि इन नए प्रोजेक्ट्स में पूंजी (Capital) की मांग ज्यादा है। सड़क निर्माण में अक्सर हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) का इस्तेमाल होता था, जिसमें कंपनियों को कम इक्विटी लगानी पड़ती थी। वहीं, पानी या पावर सेक्टर में कंपनियों को कुल प्रोजेक्ट लागत का 20% तक इक्विटी के तौर पर लगाना पड़ सकता है। इससे कंपनियों के कैश फ्लो पर बुरा असर पड़ सकता है और उन पर कर्ज का बोझ भी बढ़ सकता है।

एसेट रिसाइकिलिंग का सहारा

इस नकदी संकट से निपटने के लिए कंपनियां अब 'एसेट रिसाइकिलिंग' का सहारा ले रही हैं। इसके तहत वे अपने पुराने चालू रोड प्रोजेक्ट्स को बेचकर फंड जुटा रही हैं, ताकि नई योजनाओं में पैसा लगाया जा सके। हालांकि, कंपनियों की सफलता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि वे बिना किसी देरी या लागत वृद्धि के इन जटिल नए प्रोजेक्ट्स को कैसे पूरा करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.