पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते सुरक्षित ओवरलैंड एनर्जी पाइपलाइनों की मांग बढ़ी है। इसका सीधा फायदा Welspun Corp और Jindal Saw जैसी भारतीय स्टील पाइप निर्माता कंपनियों को मिल रहा है। हालांकि, बढ़ते फ्रेट कॉस्ट और प्रोजेक्ट में देरी जैसे जोखिमों पर नजर रखना ज़रूरी है।
पश्चिम एशिया की बदली रणनीति से भारतीय कंपनियों की बल्ले-बल्ले
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर देशों की सोच बदल दी है। पारंपरिक समुद्री मार्गों की बढ़ती असुरक्षा के चलते, अब ये देश तेल, गैस और पानी के लिए सुरक्षित ओवरलैंड पाइपलाइन नेटवर्क बनाने पर जोर दे रहे हैं। इस बड़े बदलाव से भारत की पाइप बनाने वाली कंपनियों के लिए प्रोजेक्ट्स की बौछार आ गई है।
लोकल प्रेजेंस और बड़े ऑर्डर
प्रमुख कंपनियां इन कॉन्ट्रैक्ट्स को हासिल करने के लिए पश्चिम एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। Jindal Saw, अबू धाबी में 3,00,000 टन सालाना क्षमता वाला नया सीमलेस पाइप प्लांट लगा रही है। साथ ही, सऊदी अरब में भी इसके ज्वाइंट वेंचर्स हैं जो लाइन पाइप्स और डक्टाइल आयरन पाइप्स पर फोकस करेंगे। वहीं, Welspun Corp अपने बड़े ग्लोबल ऑर्डर बुक, जो ₹24,750 करोड़ से ज़्यादा है, को संभालने के लिए सऊदी अरब में अपनी मज़बूत पकड़ का फायदा उठा रही है।
Man Industries, जिसने सऊदी अरब में National Pipe Co का अधिग्रहण किया है, और Ratnamani Metals and Tubes जैसी कंपनियां भी पावर जनरेशन और डिसैलिनेशन जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों को सप्लाई करने के लिए तैयार हैं।
बढ़ते जोखिम और मार्जिन पर दबाव
हालांकि मांग के आसार अच्छे हैं, लेकिन इस बिजनेस में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। वही भू-राजनीतिक तनाव, जिसके कारण पाइपलाइन की मांग बढ़ी है, ग्लोबल लॉजिस्टिक्स पर भी भारी पड़ रहा है। कंपनियों को फ्रेट कॉस्ट (भाड़ा) और मरीन इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। कई जहाज़ों को अब केप ऑफ गुड होप जैसे लंबे रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। इसके अलावा, खास तरह के हाई-ग्रेड स्टील के लिए ये कंपनियां आयात पर निर्भर हैं। अगर ये कंपनियां बढ़ते शिपिंग और कच्चे माल की लागत को ग्राहकों पर पूरी तरह से नहीं डाल पाईं, तो उनके मुनाफे (Profit Margins) पर दबाव आ सकता है।
मार्केट में कैसी रही परफॉरमेंस?
बाजार में निवेशकों का भरोसा इन कंपनियों के बढ़ते कारोबार को दर्शाता है। Welspun Corp के शेयर इस साल अब तक 133% चढ़ चुके हैं, जबकि Jindal Saw में 59% का उछाल आया है। Man Industries भी 52% बढ़ा है। दूसरी ओर, Ratnamani Metals and Tubes में इसी अवधि में 1.3% की मामूली गिरावट देखी गई है, जिसे बाजार विश्लेषकों ने तिमाही नतीजों में नरमी से जोड़ा है।
आगे क्या?
लंबी अवधि में इन कंपनियों के लिए असली कामयाबी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने और महंगाई के माहौल में लागत को प्रभावी ढंग से मैनेज करने पर निर्भर करेगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या ये निर्माता एनर्जी और फ्रेट कॉस्ट में अस्थिरता के बावजूद अपने मुनाफे को बनाए रख पाते हैं। मध्य पूर्व में नई मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं के चालू होने की समय-सीमा और सप्लाई चेन की बाधाओं से निपटने पर कंपनी मैनेजमेंट की टिप्पणी पर नज़र रखना अहम होगा।
